भारतीय रुपया आखिर क्यों कमजोर हो रहा है, इसको लेकर सोमवार को सरकार की तरफ से संसद में जवाब दिया गया। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि भारतीय रुपए में गिरावट के बावजूद इसका प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले मार्च से दुनिया भर में लगातार क्षेत्रीय टकराव देखने को मिल रहा है। यह भी भारतीय रुपए की कमजोरी के पीछे एक बड़ी वजह रही। इस दौरान उन्होंने इसके लिए किए जा रहे उपायों के बारे में भी बताया।
बारीकी से हो रही निगरानी
पंकज चौधरी ने कहा कि भारतीय रुपए की कीमत मार्केट के आधार पर तय होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजारों की बारीकी से निगरानी कर रहा है। इसके साथ ही विदेशी मुद्रा फंडों में विविधता और विस्तार करके विनिमय दर की अस्थिरता को कम करने के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा की है। चौधरी ने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका ने ब्याज दरों में इजाफा करके डॉलर इंडेक्स को दो दशक के उच्च स्तर पर मजबूत किया। आज यह वर्तमान में 6.7% ऊपर है। कांग्रेस सांसद सुब्बुरामन थिरुनावुक्करासार ने भारतीय रुपए में आ रही गिरावट को लेकर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि आखिर यह अमेरिकी डॉलर और यूरो की तुलना में इतना नीचे चला गया। सुब्बुरामन ने रुपए की स्थिति बेहतर करने के लिए सरकार द्वारा अपनाए जा रहे उपायों के बारे में भी पूछा था।
यह है दुनिया का हाल
वित्त मंत्रालय के मुताबिक 19 अक्टूबर 2022 तब अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया 8.7 फीसदी तक कमजोर था। बाद में इसकी स्थिति में कुछ सुधार आया है और 28 फरवरी 2023 तक इसमें सुधार होकर 8.3 फीसदी तक पहुंच चुका है। मिनिस्ट्री के मुताबिक यह बाजार की कई अन्य मुद्राओं, जैसे दक्षिणी अफ्रीकी रैंड, जो कि इसी दौरान अमेरिकी डॉलर की तुलना में 20.4 फीसदी तक गिरा था, ब्राजीलियन रील (9.5 फीसदी), चीनी रेन्मिन्बी (8.6 फीसदी), दक्षिण कोरियन वो (8.4 फीसदी) से बेहतर हालत में रहा। 19 अक्टूबर 2022 को भारतीय रुपया एक अमेरिकी डॉलर की तुलना में 83.02 पर बंद हुआ था। वहीं, 20 अक्टूबर को इसमें सबसे ज्यादा गिरावट आई और यह 83.29 के स्तर पर पहुंच गया। बाद में यह 82.76 पर बंद हुआ। दो फरवरी 2023 को भारतीय रुपया यूरो की तुलना में 90.39 पर बंद हुआ।
अभी इतना है विदेशी मुद्रा भंडार
भारतीय रिजर्व बैंक के पास करीब 600 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जिसे भारतीय रुपए की हिफाजत में लगाया गया है। इसके अलावा अधिकारियों ने गोल्ड पर आयात शुल्क बढ़ाने के साथ पेट्रोलियम आयात पर शुल्क में इजाफा किया है। साथ ही देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के उपायों और व्यापार के रुपयों में सेटलमेंट की भी इजाजत दी है। पंकज चौधरी ने संसद में बताया कि भारत से निर्यात को बढ़ावा देने और भारतीय रुपये में ग्लोबल ट्रेडिंग कम्यूनिटी की बढ़ती रुचि का समर्थन करने के लिए, RBI ने 11 जुलाई 2022 को भारतीय रुपए में निर्यात/आयात के चालान, भुगतान और निपटान के लिए अतिरिक्त इंतजाम किया है।



































