विदेश मंत्रियों की अहम वार्ता: क्षेत्र में जारी कूटनीतिक हलचलों के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी के साथ महत्वपूर्ण बातचीत की है। ओमान की भूमिका इस पूरे विवाद में अहम रही है, क्योंकि लड़ाई के इस नवीनतम दौर से पहले उसने अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता में एक पर्यवेक्षक के रूप में काम किया था।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व: दोनों विदेश मंत्रियों के बीच यह कूटनीतिक बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए एक नई योजना पेश की है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा आमतौर पर इसी अहम मार्ग से होकर गुजरता है।
ईरान का सख्त रुख: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने रविवार को स्पष्ट किया कि ईरान इस अहम जलमार्ग पर अपने रुख से बिल्कुल भी पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने अमेरिका को कड़ा संदेश देते हुए दृढ़ता के साथ कहा कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पूरी तरह से इस्लामिक गणराज्य ईरान का है।
युद्ध-पूर्व स्थिति से इनकार: उपाध्यक्ष निकजाद ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए यह भी साफ कर दिया कि उनका देश किसी भी कीमत पर युद्ध-पूर्व की स्थिति में वापस नहीं लौटेगा। उनके इस बयान से यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि ईरान इस मौजूदा विवाद में अमेरिका की किसी भी दबाव की कूटनीति के आगे झुकने या समझौता करने को तैयार नहीं है।
नुकसान की भरपाई के प्रयास: इस कूटनीतिक और सैन्य तनातनी के साथ ही ईरान युद्ध के दौरान हुए भारी नुकसान से उबरने की कोशिशों में भी जुटा हुआ है। अली निकजाद ने जानकारी दी कि देश में युद्ध की वजह से क्षतिग्रस्त हुए विभिन्न व्यवसायों और संपत्तियों की भरपाई के लिए काम किया जा रहा है, ताकि आंतरिक आर्थिक स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके।
अमेरिकी नाकेबंदी की विफलता: ईरानी नेतृत्व को पूरा विश्वास है कि अमेरिका की नई दबाव रणनीतियां उनके देश के खिलाफ कारगर साबित नहीं होंगी। निकजाद ने दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की नाकेबंदी की योजना निश्चित रूप से विफल साबित होगी। इन सभी बयानों और दावों से यह साफ है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।



































