आम आदमी पार्टी (आप) के दूसरे सबसे बड़े नेता और संस्थापकों में शामिल मनीष सिसोदिया पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कस गया है। शराब घोटाले के आरोप में पहले उन्हें सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने गिरफ्तार करके जेल भेजा और अब वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्त में हैं।
शराब घोटाले के आरोपों में घिरे सिसोदिया को लेकर दिल्ली में राजनीति भी खूब हो रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जहां अरविंद केजरीवाल सरकार की घेराबंदी में जुटी है तो ‘आप’ भी पलटवार में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। पार्टी की पूरी कोशिश है कि घाटे को फायदे में बदल दिया जाए।
आप को क्या-क्या नुकसान?
सिसोदिया के जेल जाने को ‘आप’ के लिए अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है। दिल्ली सरकार में उपमुख्यमंत्री पद तक से लेकर 18 विभागों तक का कामकाज संभालने वाले सिसोदिया की गिरफ्तारी से जहां एक तरफ सरकार के कामकाज पर असर पड़ा है तो दूसरी तरफ संगठन में भी उनकी कमी खूब महूसस की जा रही है। तीसरा नुकसान यह हुआ है कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जन्मी पार्टी पर घोटाले के दाग लग गए हैं। सरकार, संगठन और साख तीनों ही मोर्चों पर ‘आप’ को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अब क्या है AAP का प्लान?
मनीष के जरिए जहां केजरीवाल सरकार पर विपक्ष प्रहार करने में जुटा है तो दिल्ली के सीएम सिसोदिया को ही अपना हथियार बना रहे हैं। मनीष सिसोदिया और पिछले साल से जेल में बंद एक अन्य नेता सत्येंद्र जैन को कट्टर ईमानदार और देशभक्त बताते हुए वह उन्हें क्लीनचिट देते हैं और उनकी गिरफ्तारी को दिल्ली का कामकाज रोकने की कोशिश के तौर पर पेश कर रहे हैं। एक तरफ बीजेपी घर-घर जाकर ‘आप’ पर लगे आरोपों के बारे में बता रही है तो दूसरी तरफ आप ने भी जनता के बीच खुद को पीड़ित और प्रताड़ित के रूप में पेश करके सहानुभूति बटोरने का अभियान छेड़ दिया है।
किस तरह फायदा उठाना चाहते हैं केजरीवाल?
केजरीवाल भले ही अक्सर कहते हैं कि उन्हें राजनीति करनी नहीं आती, लेकिन पिछले 10 साल में पार्टी को दो राज्यों की सत्ता और कई राज्यों की सियासत में स्थान दिला चुके नेता की राजनीतिक कुशलता किसी से छिपी नहीं है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केजरीवाल ने कम से कम 3 दांव चल दिए हैं घाटे को फायदा में बदलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। उनकी पहली कोशिश यह है कि सिसोदिया की गिरफ्तारी को राजनीतिक रंग देकर दिल्ली की जनता से सहानुभूति बटोरी जाए। यही वजह है कि वह शराब का जिक्र किए बिना कहते हैं कि सिसोदिया गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रहे थे, इसलिए उन्हें जेल में डाला गया। केजरीवाल की दूसरी कोशिश केंद्रीय जांच एजेंसियों के बहाने सीधे पीएम मोदी को टारगेट करके 2024 के लिए माहौल तैयार किया जाए। वह यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि बीजेपी का मुकाबला सिर्फ ‘आप’ कर सकती है। आप संयोजक इस ‘आपदा’ को इस अवसर के रूप में भी देख रहे हैं कि पार्टी के दूसरी पंक्ति के नेताओं को आगे लाया जाए। उन्हें सरकार और संगठन में लाकर भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है।



































