कानपुर पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सफेदपोश अपराधियों और अस्पतालों की मिलीभगत सामने आ रही है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार, इस रैकेट में शामिल चार मुख्य आरोपी, जिन्हें शुरुआत में विशेषज्ञ डॉक्टर समझा जा रहा था, वास्तव में Unqualified Medics निकले।
फर्जीवाड़े का खतरनाक तरीका (The Modus Operandi) यह गिरोह बेहद शातिराना तरीके से काम करता था ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके:
- Fake Records: किडनी प्रत्यारोपण (Kidney Transplant) को छिपाने के लिए मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड में इसे पित्ताशय (Gallbladder) का इलाज दिखाया जाता था।
- Case Study: एक साल पहले अवैध प्रत्यारोपण कराने वाली एक महिला की मौत हो गई थी, जिसे छिपाने के लिए उसे गॉलब्लैडर के बहाने दूसरे अस्पताल शिफ्ट किया गया था।
- Suspected Hospitals: दिल्ली-एनसीआर के दो Super Speciality Hospitals भी अब जांच के दायरे में हैं, जहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मरीजों को भेजा जाता था।
साहिल: बिचौलिया जो आधी कीमत पर करता था ‘Kidney Deal’ पुलिस ने कानपुर के एक बिचौलिए ‘साहिल’ की पहचान की है। वह इस गिरोह की सबसे अहम कड़ी था। साहिल बाजार दर से लगभग आधी कीमत पर किडनी का प्रबंध करता था और जरूरतमंद मरीज को गरीब डोनर (Donor) से जोड़ता था।
वर्तमान स्थिति (Current Status) पुलिस ने अब तक छह अवैध प्रत्यारोपणों की पुष्टि की है, जिनमें से पांच Ahuja Hospital में हुए थे। फिलहाल रोहित तिवारी, अमित, अफजल और वैभव जैसे मुख्य आरोपी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए दिल्ली और गाजियाबाद में लगातार छापेमारी (Police Raids) की जा रही है।



































