डिजिटल डेमोक्रेसी का प्रभाव: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर अपनी राय रखते हुए कहा है कि इसने विश्व को डिजिटल डेमोक्रेसी में बदल दिया है। विभिन्न प्लेटफॉर्म आज रचनात्मकता के सशक्त साधन हैं, लेकिन जीवन को जोखिम में डालकर रील और सेल्फी लेने की बढ़ती होड़ एक बड़ी और चिंताजनक प्रवृत्ति बन गई है।
युवाओं पर बड़ा दायित्व: मुख्यमंत्री ने किशोरों और युवाओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि उन पर अपने परिवार, समाज, प्रदेश और देश का एक बहुत बड़ा दायित्व है। उन्होंने कहा कि युवा केवल लाइक और व्यूज के लिए अपने जीवन को दांव पर न लगाएं, बल्कि सकारात्मक योगदान देकर समाज के वास्तविक नायक बनें।
व्यक्तित्व विकास पर असर: रील बनाने की दीवानगी के पीछे के मनोवैज्ञानिक कारणों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि कैसे अत्यधिक स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गेमिंग युवाओं को प्रभावित कर रहे हैं। इन आदतों का सीधा और नकारात्मक प्रभाव युवाओं के सामाजिक व्यवहार के साथ-साथ उनके समग्र व्यक्तित्व विकास पर भी पड़ रहा है।
अभिभावकों को विशेष संदेश: युवाओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने अभिभावकों के लिए भी कुछ अहम बातें कही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया के इस आधुनिक युग में डिजिटल अवेयरनेस (जागरूकता) और डिजिटल लिट्रेसी (साक्षरता) का होना हर परिवार के लिए अत्यंत आवश्यक हो गया है।
रचनात्मक कार्यों की प्रेरणा: अभिभावकों को उनका दायित्व याद दिलाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित करना उनका काम है कि बच्चे अपने समय का सही सदुपयोग करें और सोशल मीडिया का उपयोग ज्ञान के लिए हो। उन्होंने माता-पिता से अपील की है कि वे अपने बच्चों को हमेशा ज्ञानवर्धक और सकारात्मक रचनात्मक कार्यों को करने के लिए प्रेरित करें।
सरकारी योजनाओं का लाभ: मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश सरकार ने युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रखी हैं और युवा अपनी रुचि के अनुसार इनका लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि किसी भी समृद्ध प्रदेश का आधार वहां के सशक्त युवा ही होते हैं और उनके भविष्य का पहला द्वार घर की व्यावहारिक शिक्षा से ही खुलता है।



































