सरकार का बड़ा फैसला भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को नया सीडीएस नियुक्त किया है। वे भारत के सैन्य मामलों के विभाग में सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। उनकी यह महत्वपूर्ण नियुक्ति वर्तमान सीडीएस के कार्यकाल की समाप्ति के बाद प्रभावी होगी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार वे अगले आदेश तक इस उच्च स्तरीय पद पर बने रहेंगे।
अनुभवी सैन्य नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि 1 सितंबर, 2025 से सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार कार्यरत हैं। उन्होंने पूर्व में सेना स्टाफ के उप प्रमुख के रूप में भी एक वर्ष की सेवा दी है। केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में उनका कार्यकाल काफी सफल रहा था। उनका चयन उनके लंबे सैन्य अनुभव और उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड के आधार पर किया गया है।
नया नेतृत्व और बदलाव देश के वर्तमान सीडीएस जनरल अनिल चौहान का सेवाकाल 30 मई, 2026 को पूरा हो जाएगा। उनके सेवानिवृत्त होते ही एन एस राजा सुब्रमणि आधिकारिक रूप से पदभार ग्रहण कर लेंगे। यह बदलाव भारतीय सैन्य ढांचे में निरंतरता और रणनीतिक नेतृत्व सुनिश्चित करने के लिए है। अनिल चौहान ने अपने कार्यकाल में सेनाओं के एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।
सेनाओं का एकीकरण सीडीएस थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच सेतु का कार्य करने वाला सर्वोच्च पद है। इस पद का मुख्य कार्य रक्षा संबंधी निर्णयों में एकरूपता और बेहतर समन्वय स्थापित करना है। देश की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए तीनों सेनाओं का साथ चलना अनिवार्य होता है। लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि अब इस महत्वपूर्ण समन्वय की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेंगे।
अस्तित्व में आने का कारण कारगिल युद्ध के दौरान सैन्य बलों के बीच तालमेल की भारी कमी स्पष्ट रूप से सामने आई थी। उच्च स्तरीय निर्णय लेने में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए इस पद की मांग उठी। इसी ऐतिहासिक जरूरत को देखते हुए सरकार ने सीडीएस के पद का विधिवत निर्माण करवाया। जनरल बिपिन रावत इस पद पर नियुक्त होने वाले स्वतंत्र भारत के पहले सैन्य अधिकारी थे।
भविष्य की सुरक्षा नीति एन एस राजा सुब्रमणि की नियुक्ति सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। वे सैन्य मामलों के विभाग के सचिव के रूप में सरकार को रणनीतिक सलाह प्रदान करेंगे। सीडीएस के रूप में उनका प्राथमिक लक्ष्य तीनों सेनाओं को एक साझा मंच पर लाना होगा। यह नियुक्ति भारतीय रक्षा प्रणाली को और अधिक संगठित और प्रभावी बनाने के लिए की गई है।



































