शपथ से पहले विवाद तमिलनाडु के भावी मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह से पहले राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है। शनिवार 9 मई को विजय का मुख्यमंत्री पद की शपथ लेना तय है, लेकिन जालसाजी के आरोपों ने हलचल मचा दी। एएमएमके के नेता टीटीवी दिनाकरन ने आरोप लगाया कि विजय की पार्टी टीवीके ने फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया है। यह विवाद एएमएमके के इकलौते विधायक कामराज एस के समर्थन पत्र को लेकर शुरू हुआ है जो राज्यपाल को दिया गया।
फर्जीवाड़े का आरोप दिनाकरन ने शुक्रवार को राज्यपाल को पत्र देकर दावा किया कि उनके विधायक का समर्थन पत्र पूरी तरह जाली है। उन्होंने इसे सौदेबाजी और जालसाजी का मामला बताते हुए टीवीके की कड़ी निंदा की और कानूनी कार्रवाई की बात कही। दिनाकरन के अनुसार उनकी पार्टी एएमएमके का अटूट समर्थन केवल एनडीए और एआईएडीएमके गठबंधन के प्रति ही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एएमएमके का विधायक कभी भी टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन नहीं दे सकता।
पलानीस्वामी का समर्थन एएमएमके महासचिव ने एडप्पाडी के. पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री पद का सही उम्मीदवार और गठबंधन का नेता बताया है। उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात के दौरान पलानीस्वामी के समर्थन वाला असली हस्ताक्षर युक्त पत्र पेश किया। दिनाकरन ने कहा कि विधायक कामराज ने इस पत्र पर स्वयं हस्ताक्षर किए हैं और यह पूरी तरह वैध है। वे चाहते हैं कि राज्यपाल ईपीएस को सरकार बनाने का न्यौता दें क्योंकि वही गठबंधन के असली दावेदार हैं।
विधायक से संपर्क दिनाकरन ने बताया कि विवाद के दौरान उन्होंने अपने विधायक को फोन किया था लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया था। बाद में विधायक कामराज ने शाम करीब 6:30 बजे समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर किए और उसे राज्यपाल कार्यालय भेजा। दिनाकरन ने टीवी पर प्रसारित उन खबरों को गलत बताया जिनमें एएमएमके द्वारा विजय के समर्थन की बात कही गई। उन्होंने राज्यपाल आर्लेकर से इस संदिग्ध मामले की तुरंत जांच शुरू करने और न्याय करने की पुरजोर अपील की है।
लोकतंत्र का मजाक टीटीवी दिनाकरन ने एएनआई से बात करते हुए इस घटनाक्रम को लोकतंत्र का अपमान और खुला मजाक करार दिया। उन्होंने कहा कि विधायकों की खरीद-फरोख्त की ऐसी कोशिशों से तमिलनाडु की राजनीति की गरिमा को ठेस पहुंची है। दिनाकरन ने दोहराया कि एएमएमके चुनाव के समय से ही एनडीए के साथ है और पलानीस्वामी उनके नेता हैं। पार्टी ने राज्यपाल को लिखे आधिकारिक पत्र में ईपीएस को ही मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाने का आग्रह किया है।
भविष्य की राजनीति विधानसभा चुनाव में मात्र एक सीट जीतने के बावजूद एएमएमके इस समय सत्ता के समीकरणों में केंद्र में आ गई है। विजय की शपथ से पहले इस तरह के आपराधिक आरोप लगना नई सरकार की छवि के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जालसाजी के आरोप सिद्ध होते हैं तो राज्य में संवैधानिक संकट खड़ा होगा। फिलहाल शनिवार के शपथ ग्रहण समारोह पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं और मामला पुलिस तक पहुंच गया है।



































