यात्रा का विवरण: सोमवार को चीन के विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौरे की पुष्टि की। मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार यह दौरा पूरी तरह से एक राजकीय यात्रा होगा। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्वयं ट्रंप को इस यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। ट्रंप 13 मई को चीन पहुंचेंगे और वहां 15 मई तक अपने कार्यक्रम पूरे करेंगे। इस निमंत्रण ने दोनों देशों के बीच राजनयिक संवाद को फिर से शुरू किया है।
तनावपूर्ण माहौल: यह यात्रा ऐसे दौर में हो रही है जब अमेरिका कई मोर्चों पर चुनौतियों से जूझ रहा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वाशिंगटन की चिंता को काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। साथ ही अमेरिकी टैरिफ नीतियों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बड़ा संकट खड़ा है। ऐसे माहौल में ट्रंप का बीजिंग जाना अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए बड़ा संकेत है। पूरी दुनिया इस यात्रा के दौरान होने वाले समझौतों पर अपनी नजर बनाए हुए है।
ट्रंप का विश्वास: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी इस यात्रा से काफी सकारात्मक उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि शी जिनपिंग उन्हें देखते ही गले लगा लेंगे। ट्रंप ने कई बार दोहराया है कि वह शी जिनपिंग से मिलने हेतु बहुत उत्साहित हैं। उन्हें विश्वास है कि चीन में उनका स्वागत पिछली बार की तरह ही ऐतिहासिक होगा। ट्रंप इस मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक टर्निंग पॉइंट मानते हैं।
चुनौतियों का साया: विशेषज्ञों का दावा है कि टैरिफ और ईरान विवाद के कारण स्थिति काफी जटिल है। चीन और अमेरिका के बीच कई आर्थिक क्षेत्रों में गहरा टकराव बना हुआ है। ईरान में जारी जंग ने भी दोनों महाशक्तियों के बीच आपसी अविश्वास को बढ़ाया है। इन कारणों से ट्रंप की भविष्यवाणी के सच होने पर जानकारों को संदेह है। आपसी मतभेदों के कारण संबंधों में पहले जैसी मिठास आने की उम्मीद कम है।
हथियार विवाद: ट्रंप ने पहले चीन को ईरान की मदद करने के मुद्दे पर सीधे टारगेट किया था। उन्होंने घोषणा की थी कि ईरान को हथियार देने वालों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। बाद में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनकी शी जिनपिंग से इस विषय पर बातचीत हुई। जिनपिंग ने ईरान को किसी भी प्रकार का हथियार भेजने के दावों को गलत बताया। इसी बातचीत के बाद अमेरिका ने चीन के प्रति अपने रुख में बदलाव किया।
पिछली मुलाकातें: साल 2017 की ट्रंप की चीन यात्रा को दुनिया ने एक भव्य इवेंट के रूप में देखा था। तब चीन ने इसे सामान्य राजकीय प्रोटोकॉल से भी ऊपर का दर्जा प्रदान किया था। मार्च के आखिर में होने वाली यात्रा को ईरान युद्ध की परिस्थितियों के कारण टालना पड़ा था। ट्रंप और शी की आखिरी मुलाकात South Korea के Busan शहर में आयोजित हुई थी। वहां APEC शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की थी।



































