पेट्रोलियम का उपयोग: हैदराबाद के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने पेट्रोलियम उत्पादों के सीमित उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच गैस और डीजल का संयम जरूरी हो गया है। आयातित उत्पादों का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करने से देश की विदेशी मुद्रा सुरक्षित रहेगी। युद्ध जैसी वैश्विक परिस्थितियों के बीच यह कदम भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करेगा। पीएम ने नागरिकों से इस राष्ट्रीय प्रयास में अपना सक्रिय सहयोग देने की अपील की।
डिजिटल उद्घाटन: तेलंगाना में मोदी ने 9,400 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं का लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य में कनेक्टिविटी और ऊर्जा के विकल्पों को बेहतर बनाना है। शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विकास को राजनीति से ऊपर रखने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम पर कम निर्भरता ही भारत को वैश्विक संकटों से बचा सकती है। भारत अब ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी रणनीति को नई तकनीकों के साथ बदल रहा है।
ऊर्जा के विकल्प: पिछले कुछ वर्षों में भारत सौर ऊर्जा के मामले में वैश्विक स्तर पर काफी सशक्त हुआ है। प्रधानमंत्री ने एथनॉल सम्मिश्रण में हुई भारत की उपलब्धियों को दुनिया के सामने मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि अब देश का ध्यान सस्ती पाइपलाइन गैस और सीएनजी के नेटवर्क पर है। एलपीजी का लक्ष्य पूरा करने के बाद अब किफायती ईंधन की घर-घर पहुंच प्राथमिकता है। इन्हीं दूरदर्शी प्रयासों के चलते भारत ऊर्जा के मोर्चे पर किसी भी चुनौती के लिए तैयार है।
सामूहिक प्रयास: विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पाने के लिए राज्यों और केंद्र का साथ होना जरूरी है। मोदी ने कहा कि अलग पार्टी की सरकार होने से विकास की गति में बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने रेवंत रेड्डी से सामूहिक प्रयासों के माध्यम से राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने को कहा। प्रधानमंत्री ने राज्यों के विकास को देश की प्रगति की सबसे पहली और बुनियादी इकाई माना। उन्होंने सभी से एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण के कार्य में योगदान देने की अपील की है।
गुजरात का उदाहरण: मोदी ने मुख्यमंत्री से कहा कि केंद्र सरकार तेलंगाना को भरपूर संसाधन देने के लिए तत्पर है। उन्होंने गुजरात को पिछले 10 वर्षों में मिले सहयोग का उदाहरण देते हुए तुलनात्मक चर्चा की। पीएम ने स्पष्ट किया कि केंद्र के साथ मिलकर काम करने से ही राज्य वहां पहुंचेंगे जहां जाना चाहते हैं। अकेले रहने से संसाधनों के वितरण में बाधा आ सकती है जो विकास को प्रभावित करेगी। इसलिए उन्होंने सीएम को केंद्र के साथ मजबूती से जुड़कर कार्य करने की सलाह दी।
इंफ्रास्ट्रक्चर बजट: तेलंगाना में राजमार्गों का जाल पिछले एक दशक के भीतर रिकॉर्ड गति से दोगुना हुआ है। साल 2014 से पहले के रेलवे बजट की तुलना करते हुए मोदी ने भारी अंतर को दिखाया। पहले पूरे आंध्र प्रदेश का बजट 1,000 करोड़ से कम था, जो अब अकेले तेलंगाना का 5,500 करोड़ है। राज्य के भीतर 50,000 करोड़ रुपये की बड़ी रेल परियोजनाओं पर वर्तमान में काम चल रहा है। भारत आज आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ तेजी से अपने भविष्य को संवारने में लगा हुआ है।



































