राजनीतिक हमला: ईरान युद्ध संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सोना न खरीदने और तेल बचाने की अपील पर राजनीति तेज है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों ने ही इस अपील को भाजपा सरकार की बड़ी विफलता का प्रमाण बताया है। अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव खत्म होते ही भाजपा को देश की समस्याओं का ख्याल आने लगा है। विपक्ष का मानना है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए जनता पर पाबंदियां थोप रही है।
भाजपा का खोट: अखिलेश यादव के अनुसार, भाजपा की यह अपील वास्तव में उनकी अपनी असफलताओं की एक खुली स्वीकारोक्ति है। उन्होंने तंज कसा कि वोट हासिल करने के बाद अब भाजपा का असली चेहरा और खोट सबके सामने आ गया है। सपा नेता ने कहा कि देश की जनता में इस अपील के बाद अचानक आक्रोश का उबाल आ गया है। उन्होंने दावा किया कि अब जनता ‘नहीं चाहिए भाजपा’ का नारा बुलंद कर रही है और बदलाव चाहती है।
आर्थिक डिप्रेशन: कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भी पीएम की अपील पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए देश की बर्बादी की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने देश को एक बड़े आर्थिक संकट की ओर धकेल दिया है। कांग्रेस के अनुसार, सरकार के इन कदमों से देश व्यापारिक और आर्थिक डिप्रेशन की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को देश चलाना नहीं आता और वे बर्बादी की पटकथा लिख रहे हैं।
काली कमाई: अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपाई अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में पूरी तरह व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि आम जनता तो महंगाई के कारण पहले से ही सोना खरीदने की स्थिति में नहीं है। भ्रष्टाचार की जांच के लिए उन्होंने Lucknow से लेकर Guwahati तक का पता करने की बात भी कही। उनके अनुसार, भाजपा के भ्रष्ट लोग ही संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं और दोष जनता पर मढ़ रहे हैं।
किसान और युवा: विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान, मजदूर और युवा सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। गृहिणी से लेकर नौकरीपेशा और पेशेवर व्यक्ति तक आज महंगाई और मंदी की चपेट में पूरी तरह आ गया है। अखिलेश यादव ने कहा कि समाज के सौहार्द को नफरत फैलाकर पहले ही बर्बाद किया जा चुका है। अब अर्थव्यवस्था का रोना रोकर भाजपा अपनी जिम्मेदारियों से भागने का प्रयास कर रही है, जो अस्वीकार्य है।
विदेश नीति: अखिलेश यादव ने कहा कि विदेश नीति में गुट निरपेक्षता की परंपरागत नीति को छोड़ना देश के लिए घातक रहा है। कुछ खास गुटों और दबावों के पीछे चलने की वजह से देश की अर्थव्यवस्था आज इस बदतर स्थिति में पहुंची है। बेरोजगारी और बेकारी की समस्या ने देश के हर वर्ग को अपनी चपेट में ले लिया है। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार अपनी नाकामी स्वीकार करे और देश के संसाधनों का सही सदुपयोग करे।



































