बढ़ती उम्र के साथ इंसान की त्वचा धीरे-धीरे ढीली होने लगती है और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इस प्रक्रिया के कारण शरीर में हाथ, पैर, गर्दन और माथे की नसें त्वचा के ऊपर साफ दिखने लगती हैं। उम्र के साथ कुछ लोगों में यह समस्या अधिक बढ़ जाती है जो कि एक स्वाभाविक शारीरिक बदलाव माना जाता है। वहीं अगर किसी व्यक्ति का वजन जरूरत से ज्यादा कम हो जाए तो भी शरीर की नसें उभरने लगती हैं।
तनाव और गुस्से का सीधा असर आजकल युवाओं में भी माथे की नसें उभरने की समस्या काफी ज्यादा मात्रा में देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण बहुत ज्यादा मानसिक तनाव लेना और बार-बार गुस्सा करना विशेषज्ञों द्वारा बताया गया है। तनाव की स्थिति में माथे पर नसें अधिक दिखाई देने लगती हैं जो शारीरिक दबाव का संकेत देती हैं। ज्यादा सोचने और काम के दबाव से नसें फड़कने लगती हैं क्योंकि मांसपेशियां काफी टाइट हो जाती हैं।
Dr. Bhumesh Tyagi का चिकित्सकीय विश्लेषण Internal Medicine Department, Sharda Hospital, Noida के डॉक्टर ने इस पर अपनी विस्तृत राय दी है। उनके अनुसार माइग्रेन, टेंशन और हेडेक से जूझ रहे लोगों में मसल ट्विचिंग की समस्या अधिक होती है। नींद की कमी और नर्वस सिस्टम में उत्तेजना पैदा होने से भी माथे की नसें फूलने या फड़कने लगती हैं। शरीर में फ्लूइड्स की कमी होने पर सिरदर्द के साथ-साथ नसें भी उभरकर बाहर दिखाई देने लगती हैं।
विटामिन और जीवनशैली का महत्व शरीर में विटामिन बी12 और मैग्नीशियम की कमी होने से भी नसों के फूलने की समस्या होती है। ज्यादा मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने से आंखों और फोरहेड मसल्स पर काफी बुरा असर पड़ता है। अत्यधिक कैफीन का सेवन करना भी नसों की ट्विचिंग और सूजन को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसलिए विशेषज्ञों द्वारा स्क्रीन टाइम कम करने और पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेने की सलाह दी गई है।
गंभीर लक्षण और सावधानी आमतौर पर नसों का दिखना कोई घबराने वाली बात नहीं है, लेकिन इसमें दर्द होना गंभीर हो सकता है। अगर नस के दिखने के साथ सिरदर्द, उल्टी, चक्कर आना या धुंधलापन महसूस हो तो डॉक्टर को दिखाएं। ये लक्षण शरीर के भीतर किसी बड़ी समस्या या नसों की धड़कन के असंतुलित होने का संकेत हो सकते हैं। लंबे समय तक इन लक्षणों का बना रहना स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
राहत पाने के उपाय और सुझाव माथे की नसों को आराम देने के लिए प्रभावित स्थान पर आइस पैक का इस्तेमाल किया जा सकता है। दिमाग और नसों को शांत रखने के लिए डीप ब्रीथिंग और रोजाना 8 घंटे की नींद लेना अनिवार्य है। शरीर में पानी की मात्रा भरपूर रखें और कैफीन का सेवन जितना संभव हो उतना कम कर दें। अपने भोजन में मैग्नीशियम और विटामिन बी12 युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल कर नसों को स्वस्थ रखें।




































