सनातन हिंदू धर्म में पंचांग और शुभ तिथियों का अत्यधिक महत्व माना गया है। इसी क्रम में 21 मई 2026, दिन गुरुवार का पंचांग आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास है। यह पवित्र दिन देवाधिदेव महादेव और जगत जननी माता पार्वती के परम प्रतापी पुत्र भगवान स्कन्द (जिन्हें भगवान कार्तिकेय और मुरुगन स्वामी के नाम से भी जाना जाता है) को समर्पित है। इस दिन ‘स्कन्द षष्ठी’ का पावन पर्व मनाया जा रहा है। सबसे विशेष बात यह है कि इस ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी की तिथि पर कई दुर्लभ और अत्यंत शुभ योगों का महासंयोग एक साथ बन रहा है, जो इस दिन की महत्ता को कई गुना बढ़ा देता है।
स्कन्द षष्ठी का आध्यात्मिक महत्व और पूजा विधान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कन्द षष्ठी (जिसे दक्षिण भारत में ‘कन्द षष्ठी’ के नाम से भी विशेष ख्याति प्राप्त है) के दिन भगवान कार्तिकेय की आराधना करने से जीवन के सभी कष्टों का निवारण होता है। श्रद्धालु इस दिन पूर्ण श्रद्धा-भाव से उपवास रखते हैं और भगवान स्कन्द की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
इस व्रत को करने से साधक को अदम्य साहस, शत्रुओं पर विजय और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। स्कन्द भगवान को देवों का सेनापति कहा जाता है, इसलिए इनकी उपासना से जीवन में अनुशासन और ऊर्जा का संचार होता है। इस शुभ अवसर पर भगवान स्कन्द के मंत्रों का जाप करना, उनके समक्ष दीप प्रज्वलित करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों तथा जरूरतमंद लोगों को दान देना अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी माना गया है।
पंचांग के मुख्य अंश: सूर्योदय, सूर्यास्त और तिथि की स्थिति
किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत पंचांग की सटीक गणना के साथ की जाती है। 21 मई 2026 की भौगोलिक और खगोलीय स्थिति के अनुसार, दिन की शुरुआत सुबह 5 बजकर 27 मिनट पर सूर्योदय के साथ होगी, जबकि सूर्यास्त का समय शाम 7 बजकर 8 मिनट पर निर्धारित है।
अगर तिथि की बात करें, तो दिन के आरंभ में ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी तिथि व्याप्त रहेगी, जो गुरुवार की सुबह 8 बजकर 26 मिनट तक ही प्रभावी रहेगी। इसके तुरंत पश्चात भगवान कार्तिकेय को समर्पित पावन ‘षष्ठी तिथि’ का आरंभ हो जाएगा, जिसके साथ ही स्कन्द षष्ठी के व्रत और अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे।
गुरु पुष्य सहित तीन दुर्लभ योगों का चमत्कारी संयोग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 21 मई 2026 का दिन इसलिए भी सबसे ज्यादा खास है क्योंकि इस दिन ग्रहों और नक्षत्रों की चाल से तीन बड़े और शुभ योगों का निर्माण हो रहा है:
- गुरु पुष्य योग: गुरुवार के दिन ‘पुष्य नक्षत्र’ के पड़ने से ‘गुरु पुष्य योग’ का निर्माण होता है, जिसे ज्योतिष में सभी योगों का राजा और अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
- सर्वार्थ सिद्धि योग: यह योग पूरे दिन बना रहेगा। इस योग में किए गए सभी शुभ कार्य और संकल्प निश्चित रूप से सिद्ध होते हैं और सफलता दिलाते हैं।
- अमृत सिद्धि योग: संपूर्ण दिन अमृत सिद्धि योग का प्रभाव भी रहेगा, जो मांगलिक कार्यों, पूजा-पाठ और नई शुरुआत के लिए अमृत के समान शुभ फल देने वाला माना जाता है।
इन तीनों महायोगों के एक साथ मिलने से स्कन्द षष्ठी का यह दिन अनुष्ठान, उपवास और किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए सर्वश्रेष्ठ बन गया है।
नक्षत्र, योग और करण का सटीक समय
पंचांग के अन्य महत्वपूर्ण अंगों की स्थिति इस प्रकार रहेगी:
- नक्षत्र: गुरुवार को पूरा दिन अत्यंत शुभ पुष्य नक्षत्र व्याप्त रहेगा, जो अगले दिन यानी 22 मई की सुबह 2 बजकर 49 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके पश्चात अश्लेषा नक्षत्र लग जाएगा।
- योग: दिन के आरंभ से लेकर सुबह 10 बजकर 58 मिनट तक गण्ड योग रहेगा।
- करण: करण की बात करें तो बालव करण सुबह 8 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, और उसके बाद कौलव करण की शुरुआत होगी जो शाम 7 बजकर 20 मिनट तक चलेगा।
दिन के अत्यंत शुभ मुहूर्त और अमृत काल
इस दिन पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए कई विशेष मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे, जिनका साधकों को लाभ उठाना चाहिए:
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:05 बजे से प्रातः 4:46 बजे तक। (यह समय ध्यान और भगवान स्कन्द के मंत्र जाप के लिए सर्वोत्तम है)
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:35 बजे से दोपहर 3:29 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:07 बजे से शाम 7:28 बजे तक।
- अमृत काल: रात्रि 8:47 बजे से रात्रि 10:18 बजे तक।
राहुकाल और अशुभ समय: बरतें विशेष सावधानी
जहाँ एक ओर दिन शुभ योगों से भरा है, वहीं कुछ अशुभ समय भी हैं जिनमें मांगलिक कार्यों और नई शुरुआत को टालना चाहिए:
- राहुकाल: दोपहर 2:00 बजे से दोपहर 3:43 बजे तक राहुकाल रहेगा। ज्योतिषीय नियमों के अनुसार इस समयावधि में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य, यात्रा या नई पूजा की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
- यमगण्ड: सुबह 5:27 बजे से सुबह 7:10 बजे तक।
- गुलिक काल: सुबह 8:53 बजे से सुबह 10:35 बजे तक रहेगा।
निष्कर्ष एवं सुझाव: श्रद्धालुओं और साधकों को यह विशेष सलाह दी जाती है कि वे राहुकाल और यमगण्ड जैसे अशुभ मुहूर्तों का ध्यान रखते हुए ही अपने शुभ कार्यों और भगवान स्कन्द की पूजा का संकल्प लें। सही मुहूर्त में किए गए दान, तप और मंत्र जाप से जीवन में भगवान कार्तिकेय की असीम कृपा और सफलता प्राप्त होगी।





































