सुभासपा का बड़ा शक्ति प्रदर्शन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन किया है। सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की मौजूदगी में विपक्षी खेमे के कुल 51 वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ली। यह घटनाक्रम समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के लिए एक बहुत ही तगड़े और बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में नेताओं के टूटने से विपक्षी गठबंधन की तैयारियों को तगड़ी राजनीतिक चपत लगी है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद से ही लखनऊ के सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार काफी गर्म है।
सपा के भविष्य पर भविष्यवाणी नेताओं को सुभासपा की सदस्यता दिलाने के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के भविष्य को लेकर एक बड़ी भविष्यवाणी कर दी। उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव के बहुचर्चित पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वाले नारे को पूरी तरह से खोखला करार दिया। राजभर ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि अखिलेश चाहे जितनी भी कोशिशें या रैलियां कर लें, अब उत्तर प्रदेश में सपा की वापसी नामुमकिन है। उन्होंने साफ शब्दों में घोषणा की कि इस जन्म में तो सपा की सरकार सूबे में दोबारा कभी भी नहीं बन पाएगी।
अखिलेश के तानाशाही रवैये पर तंज ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के भीतर चल रहे कथित तानाशाही रवैये और निर्णय प्रक्रिया पर भी बहुत ही करारा व्यंग्य किया। उन्होंने मजाकिया और राजनीतिक लहजे में कहा कि सपा में जमीनी कार्यकर्ताओं और अन्य वरिष्ठ नेताओं की राय की कोई कीमत नहीं बची है। उन्होंने पार्टी की स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि वहां ‘न खाता न बही, जो अखिलेश कहें वही सही’ वाली व्यवस्था पूरी तरह लागू है। राजभर के अनुसार इसी तानाशाही और एकतरफा फैसलों के कारण ही सपा के निष्ठावान कार्यकर्ता और नेता आज लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं।
मुस्लिम इतिहास पर राजभर की मुहर इस राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान ओमप्रकाश राजभर ने प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक राजा भैया के मुस्लिम समाज से जुड़े विवादित बयान पर अपनी पूरी सहमति दे दी। उन्होंने राजा भैया के उस दावे पर मुहर लगाई जिसमें कहा गया था कि वर्तमान के सभी मुस्लिम पूर्व में हिंदू ही थे। राजभर ने कहा कि इतिहास के इस सच से कोई भी इनकार नहीं कर सकता है कि समय के साथ लोगों का मत परिवर्तन कराया गया था। राजा भैया के इस पुराने वैचारिक बयान को सही ठहराकर राजभर ने राज्य की राजनीति में एक नया धार्मिक और वैचारिक मोड़ ला दिया है।
कायर और लालची वाले बयान का बचाव सुभासपा अध्यक्ष ने राजा भैया द्वारा धर्म परिवर्तन करने वाले पूर्वजों को कायर और लालची कहे जाने वाले बयान का भी पूरी तरह से बचाव किया। उन्होंने कहा कि जो लोग किसी भी डर, लालच या प्रलोभन में आकर अपनी मूल धार्मिक आस्था को छोड़ देते हैं, वे वैचारिक रूप से कमजोर ही होते हैं। राजभर ने तर्क दिया कि इतिहास गवाह है कि विपरीत परिस्थितियों में भी जो लोग अपने धर्म पर पूरी तरह अडिग रहे, वे ही सच्चे वीर थे। उनके इस कड़े वैचारिक रुख से यह साफ संकेत मिलता है कि सुभासपा अब आने वाले चुनावों में राष्ट्रवाद के मुद्दे को और प्रखर करेगी।
शामिल होने वाले प्रमुख चेहरों की सूची सुभासपा ज्वाइन करने वाले कुल 51 नेताओं की सूची में बसपा और सपा के कई महत्वपूर्ण स्थानीय पदाधिकारियों के नाम साफ तौर पर शामिल हैं। बसपा से मनोज सिंह, शशि प्रकाश राय, वैभव राय, विवेक सिंह, रितिक राय, सुमीत पाण्डेय, शुभम राय, सतीश दूबे, शिवम सिंह, राणा प्रताप सिंह, फरीद अहमद और रवीन्द्र राजभर सुभासपा में शामिल हुए हैं। वहीं सपा खेमे से राकेश सिंह, बजरंग सिंह, शिवम सिंह, विनय सिंह, अजय कुमार, प्रवीण सिंह और संतोष यादव ने ओमप्रकाश राजभर का नेतृत्व स्वीकार किया है। इन सभी नए नेताओं के शामिल होने के बाद सुभासपा अब राज्य में एक नए राजनीतिक समीकरण को जन्म देने जा रही है।





































