अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पिछले ९ वर्षों के दौरान कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करने के लिए एक ऐतिहासिक रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। इस रिपोर्ट कार्ड के अनुसार राज्य सरकार ने अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कुल १७,०४३ सफल एनकाउंटर की कार्रवाइयों को अंजाम दिया है। इन सभी कार्रवाइयों के दौरान कुल ३४,२५३ आरोपियों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया जबकि २८९ अत्यंत दुर्दांत अपराधियों को मौके पर ही ढेर कर दिया गया। पुलिस ने अपराधियों के मनोबल को पूरी तरह तोड़ने के लिए ११,८३४ आरोपियों के पैर में गोली मारकर उनका सफल हाफ एनकाउंटर भी सुनिश्चित किया है। इस बेहद खतरनाक अभियान में राज्य के १८ वीर पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं जबकि अपनी ड्यूटी निभाते हुए कुल १८५२ पुलिसकर्मी मुठभेड़ में घायल हुए।
सुरेश कुमार खन्ना की प्रतिक्रिया: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिदिन औसतन ५ एनकाउंटर किए जाने के इस बड़े दावे पर राज्य के कैबिनेट मंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। राज्य कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश में कानून व्यवस्था का एक बड़ा मॉडल बन चुका है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अदम्य इच्छाशक्ति और पीएम मोदी के कुशल मार्गदर्शन में ही यह बड़ा बदलाव संभव हुआ है। आज उनके इसी संयुक्त प्रयास के कारण हमारा उत्तर प्रदेश पूरी तरह से हर प्रकार के संगठित और गंभीर अपराधों से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। सुरेश कुमार खन्ना के मुताबिक उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कानून व्यवस्था को पूरी तरह पटरी पर लाना और नियंत्रित करना बेहद मुश्किल कार्य था।
मेरठ और वाराणसी का प्रदर्शन: अपराधियों के खिलाफ की गई इस बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के क्षेत्रीय आंकड़ों को देखें तो मेरठ जोन राज्य में पहले स्थान पर मौजूद है। मेरठ जोन में पुलिस ने ४ हजार ८१३ कार्रवाइयां कीं जिनमें ८ हजार ९२१ आरोपी पकड़े गए और ९७ कुख्यात अपराधियों को मौके पर मार गिराया गया। इस सूची में वाराणसी जोन दूसरे स्थान पर है जहाँ १,२९२ मुठभेड़ दर्ज की गईं और २,४२६ अपराधियों को गिरफ्तार कर २९ को ढेर किया गया। वहीं आगरा जोन इस एनकाउंटर सूची में तीसरे स्थान पर है जहाँ २,४९४ कार्रवाइयां करके कुल ५,८४५ अपराधियों को दबोचने में बड़ी सफलता हासिल हुई है। इसके अलावा आगरा जोन में २४ अपराधी मार गिराए गए जबकि इस दौरान अपराधियों की गोलीबारी का सामना करते हुए कुल ६२ पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
गाजियाबाद कमिश्नरेट में सबसे ज्यादा मौतें: गाजियाबाद कमिश्नरी के अंतर्गत हुए एनकाउंटर के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां ७८९ मुठभेड़ के दौरान कुल १८ दुर्दांत अपराधियों को मार गिराया गया है। यह आंकड़ा उत्तर प्रदेश के सभी कमिश्नरेट में सबसे अधिक है जो गाजियाबाद पुलिस द्वारा अपराधियों के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई को पूरी तरह दर्शाता है। इसके साथ ही कानपुर जोन में पुलिस और बदमाशों के बीच हुए ७९१ एनकाउंटर्स में कुल १२ बड़े और वांछित अपराधियों को मार गिराया गया। वहीं राजधानी लखनऊ कमिश्नरी के तहत १४७ एनकाउंटर्स की कार्रवाइयों को अंजाम दिया गया जिनमें १२ कुख्यात अपराधियों को पुलिस ने ढेर कर दिया था। इसके अलावा प्रयागराज जोन की बात करें तो वहां कुल ६४३ एनकाउंटर्स दर्ज किए गए जिनमें ११ शातिर अपराधियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया।
विभिन्न कमिश्नरेट के आंकड़े: राज्य के अन्य प्रमुख हिस्सों के आंकड़ों के अनुसार आगरा कमिश्नरी में कुल ४८९ एनकाउंटर्स की कार्रवाइयां की गईं जिनमें १० अपराधियों को ढेर किया गया। हाईप्रोफाइल क्षेत्र गौतमबुद्ध नगर में भी पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए १,१४४ एनकाउंटर्स किए जिनमें ९ दुर्दांत अपराधियों को मार गिराने में सफलता हासिल हुई। वहीं गोरखपुर जोन के अंतर्गत पुलिस ने ६९९ एनकाउंटर्स की कार्रवाइयां दर्ज कीं जिनमें कुल ८ अपराधियों को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान मार गिराया। वाराणसी कमिश्नरी के क्षेत्र में भी सुरक्षा बलों ने १४६ एनकाउंटर्स की कार्रवाई को अंजाम दिया जिसके तहत ८ अपराधियों को मौके पर ढेर किया गया। इन सभी के साथ ही प्रयागराज कमिश्नरी में १५० एनकाउंटर्स में ६ और कानपुर कमिश्नरी में २५३ एनकाउंटर्स में ४ अपराधियों को ढेर किया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था पर अंतिम रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी यह विस्तृत रिपोर्ट साफ दर्शाती है कि राज्य के विभिन्न जोनों और कमिश्नरेट में अपराधियों का पूरी तरह सफाया किया गया है। मेरठ, वाराणसी और आगरा जोन में जहां सबसे अधिक मुठभेड़ दर्ज की गईं वहीं गाजियाबाद कमिश्नरी ने अपराधियों को ढेर करने में शीर्ष स्थान हासिल किया है। इस व्यापक अभियान के तहत ३४,२५३ अपराधियों की गिरफ्तारी और ११,८३४ हाफ एनकाउंटर ने राज्य में कानून का एक इकबाल पूरी तरह से बुलंद कर दिया है। हालांकि इस दौरान १८ वीर पुलिस जवानों की शहादत और १८५२ पुलिसकर्मियों का घायल होना पुलिस विभाग के लिए एक बहुत बड़ी अपूरणीय क्षति है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार का यह रिपोर्ट कार्ड यह साबित करता है कि राज्य में अब अपराधियों के लिए कोई भी सुरक्षित स्थान नहीं बचा है।





































