इजराइल की सेना ने दक्षिणी लेबनान के इलाके में हिजबुल्लाह के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया है। इस सैन्य अभियान के तहत इजराइली सुरक्षा बलों ने हिजबुल्लाह के लगभग 150 अलग-अलग ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कुछ दिनों पहले ही अमेरिकी मध्यस्थता के बाद दोनों पक्षों में एक सशर्त युद्धविराम पर सहमति बनी थी। परंतु मध्यस्थता और शांति की इन तमाम खबरों के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने कदम पीछे खींचने से साफ इनकार कर दिया है। नेतन्याहू के इस कड़े रुख के कारण दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमलों का सिलसिला लगातार बेहद आक्रामक रूप से आगे बढ़ रहा है।
सैन्य कमांडर सहित 12 की मौत: दक्षिणी लेबनान में इजराइल द्वारा किए गए इन विनाशकारी हमलों में कम से कम 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस हमले की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें लेबनानी सेना के कई उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारी भी मारे गए हैं। इस भारी तबाही के कारण पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई है और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। युद्धविराम समझौते के ठीक बाद इस तरह की बड़ी घटना होने से दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई और अधिक चौड़ी हो गई है। इस हमले में हुए भारी जानी नुकसान ने लेबनान सरकार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर इजराइल को घेरने के लिए मजबूर कर दिया है।
खारदाली-नबातीह मार्ग पर हमला: लेबनान की सेना द्वारा जारी विवरण के अनुसार यह हमला एक रणनीतिक सड़क मार्ग पर सैन्य गाड़ी को निशाना बनाकर किया गया। खारदाली-नबातीह सड़क पर जा रहे एक लेबनानी सैन्य वाहन पर इजराइली लड़ाकू विमानों या ड्रोनों द्वारा सीधा हमला किया गया। इस भीषण बमबारी की चपेट में आने से गाड़ी में मौजूद एक ब्रिगेडियर जनरल, एक कैप्टन और एक अन्य सैनिक की मौत हो गई। इस घटना पर अपना पक्ष रखते हुए इजरायली सेना ने कहा कि शनिवार को किया गया यह हमला एक ‘सक्रिय युद्ध क्षेत्र’ के भीतर हुआ था। इजराइल का दावा है कि वह केवल हिजबुल्लाह को निशाना बना रहा था, लेकिन यह घटना युद्ध क्षेत्र की परिस्थितियों के कारण हुई।
समझौते को तोड़ने का आरोप: लेबनानी सेना ने इस हमले को इजराइल की एक सोची-समझी और अत्यंत क्रूर आक्रामकता का हिस्सा करार दिया है। सेना ने आरोप लगाया कि इजराइल जानबूझकर और बार-बार इस तरह के हमले करके शांति स्थापित करने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा रहा है। उनका कहना है कि इस आक्रामकता का एकमात्र उद्देश्य किसी भी तरह के कूटनीतिक समाधान तक पहुंचने के सभी वैश्विक प्रयासों को विफल करना है। लेबनानी सेना ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के उकसावे वाले हमलों के बाद क्षेत्र में शांति की उम्मीदें पूरी तरह धूमिल हो चुकी हैं। इस बयान से साफ है कि लेबनानी सेना अब इजराइल के किसी भी आश्वासन पर भरोसा करने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
संप्रभुता का घोर उल्लंघन: लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इस पूरी घटनाक्रम पर अपना बेहद कड़ा और स्पष्ट विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इस इजरायली हमले की तीव्र निंदा करते हुए इसे लेबनानी संप्रभुता का एक अत्यंत घोर और अस्वीकार्य उल्लंघन घोषित किया है। राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा कि यह हमला सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों, संधियों और स्थापितNorms का पूरी तरह से खुला उल्लंघन है। उनके सुर में सुर मिलाते हुए लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने भी इस हमले की व्यापक स्तर पर कड़ी निंदा की है। लेबनानी सरकार ने इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर उठाने और इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने की मांग करने के संकेत दिए हैं।
शहीद सैनिकों को दी श्रद्धांजलि: लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने एक विशेष शोक संदेश जारी कर हमले में मारे गए वीर सैनिकों को याद किया है। उन्होंने इस हमले में शहीद हुए ब्रिगेडियर जनरल वस्साम सबरा, कैप्टन एली खौरी और सैनिक हुसैन गोजल के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। पीएम ने कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरी सरकार अपने सैनिकों के परिवारों, सहयोगियों और लेबनानी सेना के साथ मजबूती से खड़ी है। गौरतलब है कि इससे पहले भी इजरायल की वायुसेना ने पूर्वी बेका घाटी समेत हिजबुल्ला से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया था। यह चेतावनी तब आई थी जब हिजबुल्ला ने हाल ही में दक्षिणी लेबनान और उत्तरी इजराइल में ‘फाइबर ऑप्टिक ड्रोन’ से इजराइली सेना पर हमले किए थे।





































