अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से यूरेनियम वापस न लाने के कारणों का आधिकारिक खुलासा किया है। ट्रंप के अनुसार ईरान से यूरेनियम लाने के लिए एक बहुत बड़ी सैन्य तैनाती की आवश्यकता पड़ती। इस अत्यंत जटिल मिशन को पूरा करने में अमेरिकी सेना को कम से कम दो हफ्ते का समय लगता। इसके साथ ही बहुत बड़ी मात्रा में घातक हथियारों को भी ईरान की धरती पर ले जाना पड़ता। इन्हीं सब सैन्य कारणों पर विचार करने के बाद योजनाकारों ने सेना न भेजने का फैसला लिया।
समझौते और कड़े रुख पर बयान: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विस्कॉन्सिन में किसानों के साथ आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में अपनी बात रखी है। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि हम बहुत जल्द इस पूरे ईरानी संकट से बाहर निकलेंगे। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह वापसी चाहे किसी कागजी समझौते के जरिए हो या फिर किसी कड़े रुख से हो। उन्होंने आगे कहा कि कड़ा रुख अपनाना शायद हमारे लिए सबसे आसान और सीधा रास्ता साबित होगा। इस बयान से साफ है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान के खिलाफ कोई भी बड़ा कदम उठा सकता है।
किसानों को राहत का भरोसा: विस्कॉन्सिन के कार्यक्रम में राष्ट्रपति ट्रंप ने देश की आंतरिक अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र पर भी बात की। उन्होंने देश के किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे इस संकट से प्रभावित नहीं होंगे। ट्रंप ने वादा किया कि बहुत जल्द आपके उर्वरक की कीमतें चार महीने पहले की तरह बहुत कम हो जाएंगी। ईंधन और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच उर्वरक की कीमतों को नियंत्रित करना सरकार की प्राथमिकता है। राष्ट्रपति के इस भरोसे से देश के किसान वर्ग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थिति सामान्य होने का दावा: इन भीषण सैन्य हमलों से दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम के टूटने की नई आशंकाएं पैदा हो गई हैं। इसके बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने मीडिया के सामने दावा किया कि इस समय ईरान के साथ स्थिति काफी अच्छी लग रही है। ट्रंप के इस सकारात्मक बयान को विश्लेषक एक रणनीतिक कदम के रूप में देख रहे हैं। हालांकि जमीनी हकीकत को देखते हुए इस दावे पर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं।
कुवैत में लगातार हमले: इस पूरे क्षेत्रीय युद्ध के बीच कुवैत में चल रहे लगातार हमलों ने स्थिति को और नाजुक बना दिया है। इन ताबड़तोड़ हमलों के कारण ही ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी ठिकानों पर हमले शुरू किए हैं। कुवैत में हुई इस भीषण गोलाबारी ने दोनों देशों के बीच चल रहे नाजुक संघर्ष विराम को पूरी तरह तनावपूर्ण बना दिया है। इस अशांति के कारण क्षेत्र में संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने के सभी कूटनीतिक प्रयास भी पूरी तरह बाधित हो गए हैं। कोई भी देश इस समय पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है।
हवाई अड्डे पर भारी तबाही: इस सप्ताह की शुरुआत में ईरानी ड्रोनों ने कुवैत के मुख्य हवाई अड्डे को अपना निशाना बनाया था। इन घातक ड्रोनों ने हवाई अड्डे के एक प्रमुख यात्री टर्मिनल को बहुत भारी नुकसान पहुंचाया था। इस कायरतापूर्ण हमले में एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई थी जबकि दर्जनों अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस भीषण हमले के बाद सुरक्षा कारणों से हवाई अड्डे को कुछ समय के लिए पूरी तरह बंद करना पड़ा था। इस घटना के बाद से ही क्षेत्र में सैन्य तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।





































