India में बैन हो चुके विवादित संगठन PFI की मुश्किलें अब अदालत में और भी ज्यादा बढ़ गई हैं। New Delhi के Patiala House Court की विशेष NIA अदालत ने इस संगठन से जुड़े इक्कीस लोगों पर आरोप तय किए हैं। इन आरोपियों में संगठन के सबसे बड़े नेता और चेयरमैन O. M. A. Salam का नाम शीर्ष पर शामिल है। उनके साथ-साथ संगठन के वाइस चेयरमैन E. M. Abubacker पर भी अदालत ने कड़े आरोप तय कर दिए हैं। इन सभी को साल 2022 के सितंबर महीने में NIA द्वारा देश के विभिन्न राज्यों से एक बड़े ऑपरेशन के तहत गिरफ्तार किया गया था।
केरल में बना था यह विवादित संगठन PFI एक बेहद विवादित और कट्टरपंथी संगठन है जिस पर वर्तमान में देश भर में पूरी तरह से बैन लगा हुआ है। इस विवादित संगठन का निर्माण आधिकारिक रूप से साल 2006 में किया गया था। उस समय इस संगठन ने अपना मुख्य प्रशासनिक मुख्यालय Kerala राज्य में स्थापित किया था। स्थापना के बाद से ही इस संगठन के खिलाफ देशभर में अवैध फंडिंग और हिंसक गतिविधियों की साजिश के कई आरोप लगते रहे। इन लगातार देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण अंततः 2022 में केंद्र सरकार ने इसे UAPA के तहत प्रतिबंधित कर दिया।
आतंकी साजिश का ट्रायल शुरू अदालत द्वारा औपचारिक आरोप तय होने के बाद अब यह पूरा गंभीर मामला ट्रायल के अगले और अहम चरण में प्रवेश कर चुका है। इस चरण में अदालत सभी आरोपियों के खिलाफ मौजूद सबूतों और लगाए गए आरोपों की बहुत ही विस्तृत और सूक्ष्म जांच करेगी। विशेष कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि यह मामला सीधे तौर पर एक भयानक आतंकी साजिश और देश के खिलाफ गंभीर अपराधों से जुड़ा है। अदालत के रिकॉर्ड में पेश की गई सामग्री इस बात का पुख्ता संदेह पैदा करती है कि ये सभी लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकना चाहते थे। यह धर्मनिरपेक्ष सरकार के खिलाफ रची गई एक सोची-समझी और संगठित साजिश थी जिसे PFI के मास्टरमाइंड्स चला रहे थे।
शरिया कानून लागू करने की साजिश इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा ‘विजन 2047’ नाम के एक गोपनीय और भड़काऊ दस्तावेज से हुआ है। अदालत ने यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है कि यह विवादित ‘विजन 2047’ दस्तावेज PFI द्वारा ही तैयार किया गया था। इस दस्तावेज के अनुसार इन लोगों ने साल 2047 तक या उससे पहले India में इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने की योजना बनाई थी। यह खिलाफत पूरी तरह से कट्टरपंथी शरिया कानून पर आधारित होने वाली थी जिसे भारत पर थोपने की तैयारी चल रही थी। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बाकायदा भारतीय राज्य के खिलाफ बड़े पैमाने पर सशस्त्र संघर्ष शुरू करने की खतरनाक रणनीति बनाई गई थी।
ISIS को समर्थन और हिंसक मंसूबे इस संगठन के हिंसक मंसूबे केवल India तक सीमित नहीं थे बल्कि इनके तार अंतरराष्ट्रीय आतंकी समूहों से भी जुड़े हुए थे। कोर्ट ने बताया कि इस विजन दस्तावेज में Iraq और Syria के खतरनाक आतंकी संगठन ISIS को खुला समर्थन देने का निर्णय शामिल था। इसके अतिरिक्त देश के भीतर प्रमुख हिंदू नेताओं को विशेष रूप से निशाना बनाने और उन पर हमले करने की योजना भी बनाई गई थी। ये सभी देश विरोधी और हिंसक निर्णय PFI की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद की उच्च स्तरीय बैठकों में लिए जाते थे। यह स्पष्ट करता है कि ये गतिविधियां किसी सदस्य का व्यक्तिगत काम नहीं थीं, बल्कि पूरे संगठन की एक सोची-समझी और संगठित योजना थीं।
टेरर फंडिंग और अगली अदालत पेशी विशेष NIA कोर्ट ने E. M. Abubacker और 20 अन्य प्रमुख पदाधिकारियों पर कई संगीन आपराधिक धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं। इन गंभीर आरोपों में आपराधिक साजिश रचना, देश के खिलाफ सशस्त्र युद्ध छेड़ना और खतरनाक टेरर कैंप चलाना मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा इन आरोपियों पर UAPA कानून के तहत आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने और नए सदस्यों की अवैध भर्ती करने का भी आरोप है। इन सभी संगीन आरोपों पर विस्तृत कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 10 जुलाई तय की है। उस दिन इस भयानक साजिश में शामिल सभी 21 आरोपियों को अदालत के समक्ष भौतिक रूप से पेश किया जाएगा।





































