पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर एक बहुत ही विशाल रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया है। यह विशेष अभियान बुधवार की रात से शुरू होकर गुरुवार की सुबह तक लगातार चलता रहा। इस दौरान पुलिस की संयुक्त टीम ने अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की कार्रवाई की। इस जॉइंट ऑपरेशन के माध्यम से मानव तस्करी के शिकार 115 युवक-युवतियों को सुरक्षित रिहा कराया गया। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से जबरन काम कराने वाले एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है।
नाबालिग भी शामिल: पुलिस द्वारा मुक्त कराए गए इन सभी 115 लोगों में भारी संख्या में युवतियां भी मौजूद हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार रिहा कराए गए लोगों में कुल 48 लड़कियां और 67 लड़के शामिल हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि रेस्क्यू किए गए इन लोगों में कई नाबालिग बच्चे भी हैं। ये सभी लोग मूल रूप से Assam और West Bengal राज्यों के निवासी बताए जा रहे हैं। ये सभी पीड़ित मुख्य रूप से बहुत ही गरीब और कमजोर परिवारों से संबंध रखते हैं।
सरकारी नौकरी का लालच: जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि इन सभी लोगों को भारी झांसा दिया गया था। मानव तस्करों ने इन गरीब युवक-युवतियों को पक्की सरकारी नौकरी दिलाने का झूठा सपना दिखाया था। इसी सुनहरे सपने के लालच में फंसाकर इन सभी को उनके राज्यों से Samastipur लाया गया था। यहां लाकर उन्हें एक कथित सेंटर के अंदर पूरी तरह से बंधक बनाकर रखा गया था। इस सेंटर में इन लोगों की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर चौबीस घंटे सख्त निगरानी रखी जाती थी।
मारपीट और धमकियां: कथित सेंटर से छुड़ाए गए सभी पीड़ितों ने पुलिस के सामने अपनी दर्दनाक आपबीती सुनाई है। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें वहां से वापस अपने घर लौटने की बिल्कुल भी इजाजत नहीं थी। जब भी कोई काम छोड़ने की बात करता था, तो उसे बुरी तरह से डराया और धमकाया जाता था। विरोध करने वाले युवक-युवतियों के साथ वहां के गुंडे अमानवीय तरीके से मारपीट भी किया करते थे। नौकरी के लालच में आए ये सभी लोग वहां नरक जैसी प्रताड़ना सहने को मजबूर हो गए थे।
गायब युवती बनी सुराग: इस पूरे रैकेट की जानकारी पुलिस को एक लापता युवती की नियमित जांच के दौरान मिली। लापता लड़की की तलाश में जुटी पुलिस की टीम धीरे-धीरे इस बड़े नेटवर्क के करीब पहुंच गई। इसके तुरंत बाद पुलिस, महिला थाना और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने एक संयुक्त टीम का गठन किया। इस टीम ने कई सामाजिक संस्थाओं और अन्य खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर इस बड़े ऑपरेशन को चलाया। सबकी सामूहिक मेहनत और सही तालमेल के कारण ही यह इतना बड़ा रेस्क्यू अभियान सफल हो पाया है।
मास्टरमाइंड की तलाश: पुलिस अधीक्षक Arvind Pratap Singh ने इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर अपनी पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे खतरनाक नेटवर्क को चलाने वाले मुख्य मास्टरमाइंड की गहन तलाश में जुटी हुई हैं। इसके साथ ही पुलिस अब इस तरह के दूसरे नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भी छानबीन कर रही है। पुलिस और सामाजिक संस्थाएं मिलकर पीड़ितों की पहचान कर रही हैं और उनके परिवारों से संपर्क साध रही हैं।





































