रविवार को प्रधानमंत्री ने देश की नौसेना को तीन नए और ताकतवर युद्धपोत सौंपे हैं। स्वदेश में निर्मित इन तीन युद्धपोतों में ‘दूनागिरि’, ‘संशोधक’ और ‘अग्रय’ शामिल हैं। इन तीनों अत्याधुनिक जहाजों को नौसेना में शामिल करने का यह बड़ा समारोह कोलकाता में आयोजित किया गया था। इस भव्य आयोजन के दौरान प्रधानमंत्री ने समुद्री ताकत और देश की सुरक्षा के बीच का अहम रिश्ता भी समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना मजबूत समुद्री ताकत के कोई भी देश दुनिया में बड़ी शक्ति नहीं बन सकता है।
रोजगार का बड़ा माध्यम भारत सरकार मैरीटाइम सेक्टर को सिर्फ एक अलग या सामान्य सेक्टर के रूप में बिल्कुल नहीं मानती है। सरकार इस पूरे सेक्टर को एक विकसित भारत के बहुत बड़े एम्प्लॉयमेंट इंजन के तौर पर देखती है। भारत के इस उभरते हुए मैरीटाइम सेक्टर में आने वाले सालों में लाखों नई नौकरियां पैदा करने की भारी क्षमता है। जहाजों के निर्माण से देश के युवाओं के लिए रोजगार के कई नए और शानदार अवसर तेजी से खुल रहे हैं। देश का यह समुद्री क्षेत्र अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ ही बेरोजगारी को खत्म करने में भी अहम रहेगा।
उद्योगों को मिल रहा बढ़ावा स्वदेशी युद्धपोतों का निर्माण देश के कई छोटे और बड़े उद्योगों को एक नई संजीवनी प्रदान कर रहा है। एक मॉडर्न शिप को तैयार करने के लिए सैकड़ों टन स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स और भारी मशीनरी की जरूरत होती है। इसके साथ ही इन जहाजों के अंदर हजारों छोटे और बड़े कंपोनेंट भी बहुत ही सावधानी के साथ लगाए जाते हैं। इन सब जरूरी चीजों की आपूर्ति के पीछे देश की हजारों छोटी-बड़ी कंपनियां लगातार काम करती हैं। इसी व्यापक आपूर्ति श्रृंखला का सीधा मतलब है कि देश के हजारों युवाओं को रोजगार के बेहतर मौके मिलते हैं।
खरीदार से निर्माता बनने का लक्ष्य भारत अब रक्षा उत्पादों के लिए दूसरे देशों पर अपनी पुरानी निर्भरता को पूरी तरह से खत्म कर रहा है। देश के सशस्त्र बल अब दुनिया के हथियार उत्पादकों के लिए महज एक बड़ा बाजार नहीं बने रह सकते। भारत रक्षा क्षेत्र में केवल एक खरीदार देश बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि वह एक बड़ा निर्माता बनना चाहता है। देश के अंदर अब लगातार स्वदेशी मिसाइलों और आधुनिक युद्धपोतों का तेजी से निर्माण किया जा रहा है। सरकार का यह पक्का मानना है कि जिस दिन हम बड़े मेकर बन जाएंगे, उसी दिन हम ग्लोबल डिसीजन-मेकर भी बन जाएंगे।
औद्योगिक क्षमता का शानदार प्रमाण देश में बन रहे युद्धपोत भारत की बढ़ती हुई औद्योगिक क्षमता का एक बहुत ही शानदार प्रमाण पेश करते हैं। अभी देश के विभिन्न शिपयार्ड में पैंतालीस बड़े नेवल प्लेटफॉर्म का निर्माण कार्य बहुत ही तेजी के साथ चल रहा है। हाल ही के कुछ सालों में चालीस से ज्यादा मेड-इन-इंडिया वॉरशिप और सबमरीन नेवी में सफलतापूर्वक शामिल हुए हैं। इससे पहले देश ने स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का निर्माण करके अपनी समुद्री क्षमता का अद्भुत प्रदर्शन किया था। ये सभी बड़े आंकड़े सिर्फ कोई नंबर नहीं हैं, बल्कि ये भारत के एक बेहद मजबूत भविष्य की पक्की निशानी हैं।
अद्भुत और ऐतिहासिक संयोग स्वदेशी जहाजों का नौसेना में शामिल होना भारत की बढ़ती हुई आत्मनिर्भरता की एक नई और शानदार यात्रा है। आज आईएनएस अग्रय, आईएनएस दूनागिरी और आईएनएस संशोधक देश की उसी महान यात्रा को एक नई गति दे रहे हैं। इन जहाजों को नौसेना में शामिल करने का यह दिन एक बहुत ही अद्भुत और ऐतिहासिक संयोग लेकर आया है। दरअसल 21 जून की इस तारीख को पूरी दुनिया में वर्ल्ड हाइड्रोग्राफी डे के रूप में बहुत ही प्रमुखता से मनाया जाता है। इसी खास दिन पर भारत ने अपना सबसे अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफी जहाज आईएनएस संशोधक राष्ट्र की सेवा में समर्पित किया है।





































