अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चंदे की चोरी का पता लगाने के लिए गठित की गई एसआईटी की टीम अपनी जांच पूरी करके वहां से रवाना हो चुकी है। तीन वरिष्ठ सदस्यों वाली इस विशेष टीम ने बीते सोमवार से ही अयोध्या के भीतर अपनी जांच का मोर्चा संभाल रखा था। इस टीम ने छह दिनों के भीतर साठ घंटे से भी ज्यादा समय तक राम मंदिर के विभिन्न विभागों में जाकर सघन जांच की है। एसआईटी इस पूरे मामले की अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को बहुत जल्द ही सौंपने की तैयारी में जुटी हुई है।
चोरी पर राष्ट्रव्यापी आक्रोश: राम मंदिर में भगवान के चढ़ावे और चंदे की चोरी की खबर सामने आने के बाद से ही पूरे देश के लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। दुनिया भर के राम भक्त इस घटना से काफी ज्यादा आहत हैं और वे पवित्र मंदिर में चोरी करने वाले चोरों के लिए कठोरतम कानूनी सजा की मांग उठा रहे हैं। दूसरी तरफ इस संवेदनशील मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार का रवैया भी बेहद सख्त और कड़ा बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने स्वयं यह साफ कर दिया है कि इस अपराध में शामिल किसी भी दोषी व्यक्ति को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों से सवाल-जवाब: एसआईटी ने अपनी जांच के छठवें दिन भी कड़ा रुख अपनाते हुए ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक से लंबी पूछताछ की है। जांच टीम ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और इसके संस्थापक सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को शामिल करके तीखे सवाल-जवाब किए हैं। इसके अलावा चंपत राय के करीबी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, गोपाल राव, लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा से भी इस मामले में पूछताछ हुई है। दान राशि की गिनती की जिम्मेदारी संभालने वाले बैंक और ट्रस्ट के कर्मचारियों से भी पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली गई है।
कर्मचारियों के रिकॉर्ड की छानबीन: राम मंदिर के कामकाज और व्यवस्थाओं से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हर एक कर्मचारी का पूरा पिछला रिकॉर्ड बहुत ही गहनता से खंगाला जा रहा है। एसआईटी की अब तक की पड़ताल से यह बात पूरी तरह से प्रमाणित हो चुकी है कि चढ़ावे के प्रबंधन में भारी अनियमितताएं और गड़बड़ी हुई हैं। जांच के दौरान अधिकारियों को मंदिर में चढ़ाए गए सोने और चांदी से जुड़ा कोई भी आधिकारिक रिकॉर्ड या बही-खाता उपलब्ध नहीं हो सका है। इस बड़ी लापरवाही के सामने आने के बाद अब मंदिर के पूरे प्रबंधन तंत्र को बदलने की कवायद शुरू हो गई है।
जांच टीम के उच्च अधिकारी: इस हाई-प्रोफाइल जांच को पूरा करने वाली एसआईटी टीम में देश के तीन बेहद अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। इन सदस्यों में लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार मुख्य रूप से शामिल हैं। इन तीनों अधिकारियों ने संयुक्त रूप से राम मंदिर परिसर के भीतर बने काउंटिंग सेंटर, सुरक्षा के लिए लगे सीसीटीवी कैमरों और दान पात्रों की गहन चेकिंग की है। टीम ने चढ़ावे की सुरक्षा से जुड़े हर एक बिंदु को अपनी जांच का हिस्सा बनाया है।
चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल: अधिकारियों की इस टीम ने मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा डाली जाने वाली दान पेटी की गिनती से लेकर उस राशि को बैंक खाते में जमा कराने तक की पूरी चेन की जांच की है। इसके साथ ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा भगवान राम को अर्पित किए जाने वाले सोने-चांदी के सिक्कों, मुकुटों और बेशकीमती गहनों के रखरखाव की व्यवस्था को भी परखा गया है। ट्रस्ट में चंपत राय के पास मुख्य प्रबंधन और कर्मचारियों की नियुक्ति की जिम्मेदारी है, जबकि डॉ. अनिल मिश्रा निर्माण और दान व्यवस्था पर नजर रखते हैं। वहीं टिन्नू यादव दान राशि की गिनती से संबंधित ड्यूटी का कार्य संभालते हैं।





































