वॉशिंगटन डीसी से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया और कुछ शक्तिशाली गैर-सरकारी समूह अमेरिकी चुनाव प्रणाली (इलेक्शन सिस्टम) में साइबर अटैक कर उसे प्रभावित करने की पूरी क्षमता रखते हैं। राष्ट्रपति ने यह चौंकाने वाला दावा अपनी सरकार की ओर से जारी किए गए नए ‘डीक्लासिफाइड’ (अवर्गीकृत) खुफिया दस्तावेजों के आधार पर किया है। ‘इलेक्शन इंटीग्रिटी’ (चुनावी अखंडता) पर राष्ट्र के नाम दिए गए अपने विशेष संबोधन में ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों के तीसरे सेट से यह पूरी तरह साबित होता है कि अमेरिकी प्रशासन को कई वर्षों से अपने चुनावी ढांचे की इन गंभीर कमजोरियों की पूरी जानकारी थी।
विदेशी हस्तक्षेप और कमजोर वोटिंग सिस्टम का आरोप
ट्रंप ने अपने दावों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि चीन की दखलंदाजी को छिपाना तो सिर्फ एक शुरुआत थी। आज जो तीसरा दस्तावेजी सेट सार्वजनिक किया जा रहा है, वह यह साफ करता है कि कई वर्षों तक अमेरिकी जनता से चुनावी ढांचे की सुरक्षा को लेकर सच छिपाया गया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) और काउंटिंग सिस्टम पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ये बेहद कमजोर हैं और इनमें आसानी से डिजिटल सेंध लगाई जा सकती है। इसके साथ ही ट्रंप ने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में चीन की दखलअंदाजी की बात को दबाने वाले अमेरिकी अधिकारियों की जांच के सख्त आदेश भी जारी कर दिए हैं।
केंद्रीकृत डेटा भंडार और वेबसाइटों पर सबसे बड़ा जोखिम
राष्ट्रपति ने यूएस इंटेलिजेंस कम्युनिटी की एक विस्तृत रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि विरोधी देशों के निशाने पर सबसे ज्यादा अमेरिका के केंद्रीकृत डेटा भंडार (सेंट्रलाइज्ड डेटा रिपॉजिटरी) हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता पंजीकरण डेटाबेस, पोलबुक और सरकार की आधिकारिक चुनावी वेबसाइटें सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। यदि कोई विरोधी देश या हैकर समूह इन प्रणालियों तक अपनी पहुंच बना लेता है, तो वे पूरी चुनावी प्रक्रिया को बड़े पैमाने पर बाधित कर सकते हैं। ट्रंप ने इसे सीधे तौर पर अमेरिकी लोकतंत्र के केंद्र पर एक बड़ा साइबर हमला करार दिया है।
वेनेजुएला सरकार की साजिश का भी हुआ भंडाफोड़
डोनाल्ड ट्रंप ने नए अवर्गीकृत दस्तावेजों में केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) की एक बेहद गोपनीय रिपोर्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इस रिपोर्ट में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासन की एक विशेष डिजिटल साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तहत 2020 के चुनाव परिणामों में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हेरफेर करने की योजना बनाई गई थी। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, तस्करों और विरोधी ताकतों के पास ऐसे डिजिटल तरीके मौजूद थे जिनकी मदद से वोटों की संख्या को इस तरह बदला जा सकता था कि बाद में ऑडिट (जांच) के दौरान भी गड़बड़ी का पता न चले।
चुनावी प्रणाली को सुरक्षित करने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में राष्ट्रपति ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इन खुफिया जानकारियों के सामने आने के बाद अब अमेरिका को बिना कोई समय गंवाए तुरंत ऐसे कड़े कदम उठाने चाहिए, जिससे देश की चुनावी प्रणाली को भविष्य में कभी भी हैक या बाहरी ताकतों द्वारा प्रभावित न किया जा सके। व्हाइट हाउस द्वारा जारी बयान में भी स्पष्ट किया गया कि जनवरी 2020 से जून 2026 तक की अवधि को कवर करने वाली इन खुफिया रिपोर्टों को सार्वजनिक करने का एकमात्र उद्देश्य व्यवस्था की कमियों को उजागर करना और देश के लोकतांत्रिक ढांचे को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है।










































