भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास रच दिया है। इस शानदार जीत के साथ ही उन्होंने इस खेल प्रतियोगिता में लगातार अपना तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर एक ऐतिहासिक हैट्रिक पूरी कर ली है। प्रतियोगिता की शुरुआत में ही उन्होंने सबसे अधिक 82 किग्रा वजन चुना था, जिसके कारण वह मुकाबला करने के लिए काफी देर से मैदान में उतरीं। इस बीच नाइजीरिया और श्रीलंका की प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी अपने प्रयासों में असफल होकर पहले ही मेडल की रेस से बाहर हो गईं। इससे पहले भी उन्होंने 2018 और 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए इस स्पर्धा का गोल्ड मेडल जीता था।
स्नैच और क्लीन एंड जर्क में अनोखा रिकॉर्ड स्नैच राउंड में मीराबाई चानू ने अपनी दूसरी कोशिश में 82 किग्रा और तीसरी कोशिश में 85 किग्रा वजन उठाकर लगातार दो बार नया रिकॉर्ड कायम किया। यह 85 किलोग्राम का भार कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में अब तक किसी भी एथलीट द्वारा उठाया गया सबसे ज्यादा वजन बन गया है। इसके बाद क्लीन एंड जर्क राउंड में उन्होंने 105 किग्रा वजन चुनने का साहसिक फैसला किया। हालांकि वह अपनी पहली कोशिश में चूक गईं, लेकिन इसके बाद जबरदस्त वापसी करते हुए 105 किग्रा का भार सफलतापूर्वक उठा लिया। पूरे इतिहास में किसी भी एथलीट ने दुनिया के किसी भी बड़े मंच पर इतना अधिक वजन कभी नहीं उठाया है।
चोट के बाद शानदार वापसी और रजत पदक पुरुषों के 65 किलोग्राम भार वर्ग में भारत के राजा मुथुपंडी ने शानदार वापसी करते हुए वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल अपने नाम किया है। उन्होंने स्नैच में 126 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 160 किग्रा उठाकर कुल 286 किलोग्राम वजन के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। साल 2019 में कोहनी की गंभीर चोट की वजह से उनका करियर खत्म होने की कगार पर था और वह 2022 के बर्मिंघम खेलों से बाहर रहे थे। उन्होंने साल 2025 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में कुल 299 किलोग्राम वजन उठाकर अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर बनाया था और नौवां स्थान पाया था। वहीं, मलेशिया के अजनील बिन बिदिन मोहम्मद ने रिकॉर्ड 299 किलोग्राम वजन उठाकर लगातार अपना तीसरा गोल्ड मेडल जीता।
वेटलिफ्टिंग में एक और शानदार प्रदर्शन कॉमनवेल्थ गेम्स के चौथे दिन पुरुषों के 60 किग्रा वेटलिफ्टिंग में चनंबम ऋषिकांत सिंह ने भी अपने पहले ही प्रयास में कमाल कर दिया। उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 264 किग्रा वजन उठाया और सिल्वर मेडल जीतकर देश के लिए एक और पदक पक्का किया। उन्होंने स्नैच राउंड में 121 किग्रा और क्लीन एंड जर्क राउंड में 143 किग्रा का भार सफलतापूर्वक उठाया। इस तरह चौथे दिन टीम को कुल तीन मेडल मिले, जिनमें एक गोल्ड और दो सिल्वर शामिल थे। इन खिलाड़ियों से पहले टूर्नामेंट के दूसरे दिन पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने भी देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
पदक तालिका में देश की मजबूत स्थिति ग्लासगो में आयोजित हो रहे 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग टीम का यह बहुत ही बेहतरीन प्रदर्शन जारी है। राजा मुथुपंडी और अन्य खिलाड़ियों के पदकों को मिलाकर वेटलिफ्टिंग में भारत के कुल पदकों की संख्या अब चार हो गई है। इस प्रतियोगिता में टीम अब तक वेटलिफ्टिंग के अंदर एक गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी है। सभी खेलों के पदकों को मिलाकर मेडल टैली में भारत अब सातवें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया कुल 12 गोल्ड समेत 24 मेडल जीतकर पदक तालिका में पहले पायदान पर मजबूती से बना हुआ है।
लॉन बॉल्स और तैराकी स्पर्धाओं के परिणाम इन सफलताओं के बीच लॉन बॉल्स के महिला पेयर्स सेक्शनल प्ले मुकाबले में भारत को निराशा का सामना करना पड़ा। भारत की रूपा रानी तिर्की और पिंकी सिंह की जोड़ी को नामीबिया के खिलाफ टाईब्रेक तक चले कड़े मुकाबले में 0-3 से हार मिली। हालांकि, तैराकी के मैदान से भारत के लिए बहुत ही अच्छी और उत्साहजनक खबर सामने आई। श्रीहरि नटराज, आर्यन नेहरा, अनीश गौड़ा और दक्षन शशिकुमार की चौकड़ी ने पुरुषों की 4×200 मीटर फ्रीस्टाइल रिले हीट्स में हिस्सा लिया। इस भारतीय टीम ने रिले हीट्स में तीसरा स्थान हासिल करके फाइनल के लिए सफलतापूर्वक क्वालीफाई कर लिया है।











































