केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नशे के खिलाफ सरकार की आगे की रणनीति को लेकर बड़ा लक्ष्य सामने रखा है। उन्होंने कहा कि नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई अब स्पष्ट लक्ष्य, तय समय-सीमा और जवाबदेही के साथ लड़ी जाएगी और वर्ष 2029 तक भारत से नशे के कारोबार को खत्म करने की दिशा में निर्णायक कार्रवाई की जाएगी। एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अमित शाह ने कहा कि नारकोटिक्स भारत के लिए सबसे गंभीर खतरों में शामिल हो गया है। उन्होंने नशा-मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार के विभागों और राज्य सरकारों के बीच मजबूत तालमेल को जरूरी बताया। उनके अनुसार, अलग-अलग स्तर पर होने वाली कार्रवाई को एक साझा अभियान में बदलना होगा, ताकि तय लक्ष्य को समय पर हासिल किया जा सके।
राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय जरूरी: गृह मंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल केंद्र सरकार के स्तर पर नहीं जीती जा सकती। इसके लिए सभी राज्य सरकारों और केंद्र के विभागों को एक साथ काम करना होगा। उन्होंने कहा कि जब तक सभी संबंधित पक्ष वर्ष 2029 तक नशा-मुक्त भारत के बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिलकर काम नहीं करते, तब तक इस अभियान को अपेक्षित गति नहीं मिल सकती। अमित शाह ने तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन को इस दिशा में आगे की रणनीति तय करने का महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने लक्ष्य के साथ समय-सीमा और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि कार्रवाई के बाद उसके परिणामों की भी स्पष्ट रूप से समीक्षा की जा सके और जिम्मेदारियों को तय किया जा सके।
कई पुरानी चुनौतियों से निपटने का दावा: अमित शाह ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सरकार ने कश्मीर में आतंकवाद, उत्तर-पूर्व में उग्रवाद और नक्सलवाद जैसी कई चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के सहयोग से उन बड़ी समस्याओं को समाप्त करने की दिशा में काम किया, जिनका भारत कई दशकों से सामना कर रहा था। गृह मंत्री ने नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई को भी इसी तरह व्यापक और संगठित प्रयास के रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, अब नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान में भी कार्रवाई को अलग-अलग स्तर पर चलाने के बजाय एक साझा व्यवस्था के तहत आगे ले जाना होगा, जिससे नशे के कारोबार से जुड़े पूरे तंत्र को निशाना बनाया जा सके।
युवाओं और आने वाली पीढ़ियों का मुद्दा: अमित शाह ने नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई को सभी लड़ाइयों में सबसे कठिन बताया और कहा कि इसे छोड़ा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य के साथ युवाओं को देश के विकास से जोड़ना और आने वाली पीढ़ियों को नशे के खतरे से बचाना जरूरी है। उनके अनुसार, इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भारत को नशा-मुक्त बनाना एकमात्र विकल्प है। अमित शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नशा-मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में कई कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। अब इन कदमों को और प्रभावी बनाकर अभियान को अंतिम परिणाम तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
कार्रवाई का तरीका बदलने पर जोर: गृह मंत्री ने कहा कि अब नशे के खिलाफ अभियान को केवल बैठकों, रिपोर्ट और जब्ती तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अब बैठक से मिशन की ओर, रिपोर्टिंग से नतीजों की ओर, जब्ती से नेटवर्क को ध्वस्त करने की ओर और मामले से सजा दिलाने की ओर बढ़ना होगा। अमित शाह ने बताया कि पहली एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स बैठक में संस्थागत व्यवस्था तैयार की गई थी। इसके बाद दूसरी बैठक में इस व्यवस्था को वास्तविक कार्रवाई में बदलने के लिए क्षमता, कार्रवाई और अमल पर चर्चा की गई। तीसरी बैठक में इसी पूरी रूपरेखा को निर्णायक लड़ाई में बदलने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य कार्रवाई को अधिक स्पष्ट, जिम्मेदार और परिणाम आधारित बनाना है।
2029 की अंतिम समय-सीमा: अमित शाह ने कहा कि इस बार का सम्मेलन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें लक्ष्य, समय-सीमा और जवाबदेही तय करके पूरी जीत की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया जा रहा है। सरकारी बयान के अनुसार, उन्होंने 31 दिसंबर 2029 तक भारत से नशीली दवाओं के कारोबार को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए काम करेंगे। इससे पहले मुंबई में अमित शाह ने भारत के ज्ञान को खत्म करने की कोशिश का भी उल्लेख किया था। उन्होंने यह बात एशियाटिक सोसाइटी में ‘गणेश ज्ञानार्थी’ विशेष पांडुलिपि प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में कही थी। अब नशे के खिलाफ अभियान में स्पष्ट समय-सीमा तय करते हुए 31 दिसंबर 2029 तक निर्णायक परिणाम हासिल करने का लक्ष्य सामने रखा गया है।













































