अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में आज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। शी जिनपिंग तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर अमेरिका पहुंचे हैं और उनके पहुंचते ही दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जॉइंट बेस एंड्रयूज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया। इस दौरान मेलानिया ट्रंप भी मौजूद रहीं। शी जिनपिंग की यह यात्रा करीब 11 साल बाद वॉशिंगटन की यात्रा है और दोनों नेताओं की मौजूदा मुलाकात को अमेरिका और चीन के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्यापार और शुल्क पर रहेगी नजर: दोनों नेताओं की बातचीत में व्यापार और शुल्क का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हो सकता है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। दोनों देशों ने पिछले वर्ष व्यापार तनाव को कम करने के लिए एक अस्थायी समझौता किया था, जिसकी अवधि नवंबर में समाप्त होनी है। ऐसे में बातचीत के दौरान इसे आगे बढ़ाने और व्यापारिक संबंधों में स्थिरता बनाए रखने पर चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच वस्तुओं के आयात-निर्यात, व्यापारिक बाधाओं और आर्थिक संबंधों से जुड़े दूसरे मुद्दे भी सामने आ सकते हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भी होगी चर्चा: व्यापार के अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता दोनों देशों के बीच बातचीत का एक प्रमुख विषय रहने की संभावना है। अमेरिका और चीन इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और तकनीकी प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित इस्तेमाल और इससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर चर्चा हो सकती है। दोनों देशों के बीच ऐसी व्यवस्था पर भी बातचीत की संभावना जताई गई है, जिसके माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी गंभीर सुरक्षा घटनाओं की जानकारी एक-दूसरे को दी जा सके। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तकनीकी क्षेत्र अब दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों का बड़ा हिस्सा बन चुका है।
ताइवान और सुरक्षा का मुद्दा: ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से मतभेद हैं और यह विषय दोनों नेताओं की बैठक में अहम रहने की संभावना है। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान स्वयं एक स्वशासित लोकतंत्र के रूप में काम करता है। ऐसे में ताइवान की सुरक्षा और उससे जुड़े अमेरिकी कदमों पर दोनों देशों की अलग-अलग स्थितियां हैं। आने वाली बातचीत में इस विषय पर दोनों पक्ष अपने रुख और चिंताओं को सामने रख सकते हैं।
ईरान और रूस से तेल खरीद भी एजेंडे में: दोनों नेताओं के बीच ईरान युद्ध और रूस से तेल खरीद से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में ऊर्जा आपूर्ति और ईरान से जुड़े घटनाक्रम का वैश्विक प्रभाव बढ़ा है। चीन और अमेरिका की नीतियां इन विषयों पर कई मामलों में अलग रही हैं। ऐसे में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली बातचीत में इन मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है। बातचीत का एक उद्देश्य इन संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखना भी हो सकता है।
भव्य स्वागत से शुरू हुई यात्रा: शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा की शुरुआत बेहद औपचारिक और भव्य स्वागत समारोह से हुई। जॉइंट बेस एंड्रयूज पर करीब 100 फीट लंबा लाल कालीन बिछाया गया। दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाए गए और अमेरिकी सेना के 479 जवानों ने सम्मान समारोह में हिस्सा लिया। आसमान में दो बी-1 बमवर्षक विमानों की उड़ान भी हुई। शी जिनपिंग और पेंग लियुआन का स्वागत डोनाल्ड ट्रंप और मेलानिया ट्रंप ने किया। इस तरह यात्रा की शुरुआत से ही अमेरिका ने इसे राजकीय महत्व वाली यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया।
मार्को रुबियो ने चीन को बताया बड़ी शक्ति: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शी जिनपिंग की यात्रा से पहले अमेरिका और चीन के संबंधों को लेकर कहा कि दोनों देश दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और उनके पास अत्यंत शक्तिशाली सेनाएं हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों का असर 21वीं सदी की दिशा पर पड़ सकता है। रुबियो ने यह भी माना कि व्यापार, आपूर्ति शृंखला, महत्वपूर्ण खनिजों और दूसरे विषयों पर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद हैं। इसके बावजूद उनका कहना था कि शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत जारी रखना जरूरी है। उन्होंने चीन को एक बड़ी आर्थिक और सैन्य शक्ति बताते हुए दोनों देशों के नेताओं के बीच संवाद को जिम्मेदार कूटनीति का हिस्सा बताया।
व्हाइट हाउस में राजकीय भोज: शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की बैठक के साथ राजकीय कार्यक्रम भी जारी रहेंगे। शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के सम्मान में व्हाइट हाउस में राजकीय भोज का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा शुक्रवार को दोनों देशों के राष्ट्रपति और उनकी पत्नियां वॉशिंगटन स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार भी जाएंगी, जहां अमेरिका और चीन के ऐतिहासिक संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों और अभिलेखों को देखा जाएगा। इस तरह तीन दिवसीय यात्रा में उच्चस्तरीय राजनीतिक बातचीत के साथ कई औपचारिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल हैं।














































