आज के ग्रह गोचर चार्ट की स्थिति: आज दिनांक 25 सितंबर 2026 को वैदिक ज्योतिष की सिडेरियन यानी निरयण पद्धति के अनुसार सूर्य कन्या राशि में उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में, चंद्रमा कुंभ राशि में शतभिषा नक्षत्र में सुबह 11:21 बजे तक और इसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में, मंगल कर्क राशि में पुष्य नक्षत्र में, बुध कन्या राशि में चित्रा नक्षत्र में, गुरु कर्क राशि में आश्लेषा नक्षत्र में और शुक्र तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में स्थित हैं। वहीं शनि मीन राशि में रेवती नक्षत्र में वक्री अवस्था में हैं। राहु कुंभ राशि में धनिष्ठा/शतभिषा तथा केतु सिंह राशि में मघा/पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के प्रभाव में हैं। ग्रहों के अगले राशि परिवर्तनों की बात करें तो सूर्य 17 अक्टूबर को तुला, चंद्रमा 27 सितंबर को मीन, मंगल 12 नवंबर को सिंह, बुध 28 सितंबर को दोपहर 12:31 बजे तुला और गुरु 31 अक्टूबर को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह में वृश्चिक राशि में जाएंगे, जबकि शनि, राहु और केतु के लिए दिए गए चार्ट के अनुसार 2026 में राशि परिवर्तन नहीं है। आज की ग्रह स्थिति में विशेष रूप से कर्क राशि में मंगल-गुरु की युति, कुंभ राशि में चंद्रमा-राहु की युति और मीन राशि में शनि की वक्री स्थिति सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ग्रह स्थिति एवं राशि परिवर्तन चार्ट (25.09.2026):
| क्र.सं. | ग्रह का नाम | वर्तमान राशि | वर्तमान नक्षत्र | अगला राशि परिवर्तन (समय सहित) |
|---|---|---|---|---|
| 1. | सूर्य | कन्या | उत्तरा फाल्गुनी | 17 अक्टूबर 2026 (तुला राशि में) |
| 2. | चन्द्रमा | कुंभ | शतभिषा (सुबह 11:21 तक), फिर पूर्वाभाद्रपद | 27 सितंबर 2026 (मीन राशि में) (चंद्रमा हर 2.25 दिन में राशि बदलता है) |
| 3. | मंगल | कर्क | पुष्य | 12 नवंबर 2026 (सिंह राशि में) |
| 4. | बुध | कन्या | चित्रा | 28 सितंबर 2026, दोपहर 12:31 बजे (तुला राशि में) |
| 5. | गुरु (बृहस्पति) | कर्क | आश्लेषा | 31 अक्टूबर 2026 (सिंह राशि में) |
| 6. | शुक्र | तुला | स्वाति | अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह में (वृश्चिक राशि में) |
| 7. | शनि (वक्री) | मीन | रेवती | वर्तमान में मीन राशि में वक्री हैं, वर्ष 2026 में इसी राशि में रहेंगे |
| 8. | राहु | कुंभ | धनिष्ठा / शतभिषा | वर्तमान में कुंभ राशि में हैं (लंबा गोचर, 2026 में परिवर्तन नहीं) |
| 9. | केतु | सिंह | मघा / पूर्वाफाल्गुनी | वर्तमान में सिंह राशि में हैं (लंबा गोचर, 2026 में परिवर्तन नहीं) |
कर्क राशि में मंगल-गुरु की युति और नीचभंग राजयोग
25 सितंबर 2026 को मंगल और गुरु दोनों कर्क राशि में एक साथ गोचर कर रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कर्क राशि मंगल की नीच राशि है, जबकि गुरु कर्क राशि में उच्च के माने जाते हैं। ऐसे में एक ही राशि में नीच मंगल और उच्च गुरु की स्थिति बनने से नीचभंग राजयोग जैसी स्थिति का निर्माण माना जा रहा है। इसका प्रभाव संबंधित राशि और भाव के अनुसार अलग-अलग दिखाई देता है। मंगल ऊर्जा, साहस, भूमि, संपत्ति, प्रतिस्पर्धा और निर्णय क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि गुरु ज्ञान, विस्तार, धन, शिक्षा और मार्गदर्शन से जुड़े ग्रह माने जाते हैं। इसलिए दोनों की युति जीवन के उन क्षेत्रों को सक्रिय कर सकती है जहां संघर्ष के साथ अवसर भी मौजूद हों। कुछ राशियों के लिए यह संयोजन उपलब्धियों, संपत्ति, करियर और आर्थिक विस्तार से जुड़ा हो सकता है, जबकि कुछ राशियों को जल्दबाजी, खर्च और विवादों से बचने की जरूरत रहेगी।
कुंभ राशि में चंद्रमा-राहु की युति से ग्रहण और जड़त्व योग
आज चंद्रमा और राहु दोनों कुंभ राशि में स्थित हैं। ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक स्थिति और निर्णय क्षमता से जोड़ा जाता है, जबकि राहु को भ्रम, अचानक बदलाव, असामान्य परिस्थितियों और महत्वाकांक्षा का कारक माना जाता है। दोनों की युति होने से ग्रहण योग तथा जड़त्व योग जैसी स्थिति का उल्लेख किया जाता है। इसका प्रभाव उन भावों पर निर्भर करेगा जहां कुंभ राशि संबंधित जातक की कुंडली में स्थित है। शुभ भावों में इसका प्रभाव अचानक लाभ, नए अवसर या अप्रत्याशित घटनाओं के रूप में देखा जा सकता है, जबकि चुनौतीपूर्ण भावों में मानसिक तनाव, भ्रम, अनिश्चितता और संबंधों में गलतफहमी जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। इसलिए आज भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में सोच-विचार करना उपयोगी रहेगा।
मीन राशि में वक्री शनि की स्थिति
शनि देव 25 सितंबर 2026 को मीन राशि में वक्री गति से गोचर कर रहे हैं और रेवती नक्षत्र में स्थित हैं। शनि को कर्म, अनुशासन, न्याय, देरी, जिम्मेदारी और दीर्घकालिक परिणामों का कारक माना जाता है। वक्री अवस्था में शनि से जुड़े पुराने मामले, अधूरे कार्य और पहले लिए गए निर्णय दोबारा सामने आने की ज्योतिषीय मान्यता है। इसका उद्देश्य केवल देरी पैदा करना नहीं माना जाता, बल्कि व्यक्ति को अपने कार्यों की समीक्षा करने, गलतियों को सुधारने और अधिक व्यावहारिक तरीके से आगे बढ़ने का अवसर भी माना जाता है। मीन राशि में शनि की स्थिति का प्रभाव विशेष रूप से उन राशियों पर महत्वपूर्ण रहेगा जिनके लिए यह गोचर लग्न, चंद्र राशि या प्रमुख भावों को प्रभावित कर रहा है। शुभ अशुभ राशियो का विवरण नीचे दिया गया हैः-
शुभ प्रभाव वाली राशियां
मेष राशि (Aries)
मंगल-गुरु युति (चौथा भाव): मेष राशि के जातकों के लिए सुख भाव में बन रहा नीचभंग राजयोग वरदान साबित होगा। प्रॉपर्टी, नया मकान या लग्जरी वाहन खरीदने के प्रबल योग बनेंगे। माता का पूरा सहयोग मिलेगा।
चंद्र-राहु युति (11वां भाव): आय के ग्यारहवें भाव में यह युति अचानक और अप्रत्याशित स्रोतों से धन का आगमन कराएगी। लॉटरी, शेयर मार्केट या पुराने अटके हुए पैसों से लाभ हो सकता है।
वक्री शनि (12वां भाव): खर्चे तो होंगे, लेकिन वे सभी निवेश या किसी शुभ कार्य पर होंगे, जिससे मानसिक संतोष मिलेगा।
सटीक उपाय: हर मंगलवार को हनुमान जी को बूंदी का भोग लगाएं और ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें।
वृषभ राशि (Taurus)
मंगल-गुरु युति (तीसरा भाव): आपके पराक्रम और आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि होगी। मीडिया, लेखन, मार्केटिंग या खेल से जुड़े लोगों को कोई बड़ी उपलब्धि हासिल हो सकती है।
चंद्र-राहु युति (10वां भाव): कार्यक्षेत्र में आपका प्रभाव बढ़ेगा। राहु आपको रणनीतिक सोच देगा, जिससे आप अपने विरोधियों को पछाड़कर दफ्तर में अपनी जगह मजबूत करेंगे।
वक्री शनि (11वां भाव): लाभ स्थान में वक्री शनि पुराने समय में की गई कड़ी मेहनत का पूरा फल देंगे। लंबे समय से रुका हुआ प्रमोशन या इंक्रीमेंट इस अवधि में मिल सकता है।
सटीक उपाय: गुरुवार के दिन माथे पर केसर का तिलक लगाएं और शनिवार को चींटियों को आटा व शक्कर डालें।
कर्क राशि (Cancer)
मंगल-गुरु युति (पहला/लग्न भाव): चूंकि यह नीचभंग राजयोग आपकी ही राशि में बन रहा है, इसलिए आपका खोया हुआ मान-सम्मान वापस लौटेगा। नेतृत्व क्षमता में अभूतपूर्व विकास होगा। सरकारी नौकरी के प्रयास सफल होंगे।
चंद्र-राहु युति (आठवां भाव): अध्यात्म, ज्योतिष या गूढ़ विज्ञान में रुचि रखने वाले कर्क राशि के जातकों को गहरी आध्यात्मिक अनुभूतियां या गुप्त ज्ञान प्राप्त हो सकता है।
वक्री शनि (नौवां भाव): शनि देव भले ही आपके काम की गति धीमी करेंगे, लेकिन वे आपको जीवन का कोई बड़ा और व्यावहारिक सबक सिखाकर भाग्य को नई दिशा देंगे।
सटीक उपाय: प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) चढ़ाएं और महामृत्युंजय मंत्र की एक माला जपें।
कन्या राशि (Virgo)
मंगल-गुरु युति (11वां भाव): लाभ स्थान में उच्च के गुरु और नीच के मंगल की युति व्यापार में अप्रत्याशित वित्तीय लाभ देगी। व्यापार का विस्तार करने के लिए समय अत्यंत अनुकूल है। बड़ी कंपनियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
चंद्र-राहु युति (छठा भाव): छठे भाव का राहु ‘शत्रुहंता’ माना जाता है। आपके गुप्त शत्रु खुद-ब-खुद शांत हो जाएंगे। कोर्ट-कचहरी या किसी पुराने विवाद में फैसला आपके पक्ष में आने की पूरी संभावना है।
वक्री शनि (सातवां भाव): पार्टनरशिप के काम में चल रही उलझनें दूर होंगी और आप अपने काम का पुनर्मूल्यांकन कर नए नियम बनाएंगे।
सटीक उपाय: बुधवार के दिन किसी जरूरतमंद को हरी मूंग की दाल का दान करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ सुनें।
तुला राशि (Libra)
मंगल-गुरु युति (10वां भाव): दशम भाव (कर्म स्थान) में कुलदीपक योग जैसा प्रभाव मिलेगा। नौकरीपेशा जातकों को बड़ी जिम्मेदारी या नया पदभार मिल सकता है। बेरोजगारों को मनचाही नौकरी के ऑफर मिलेंगे।
चंद्र-राहु युति (पांचवां भाव): रचनात्मक क्षेत्र (कला, संगीत, सिनेमा) से जुड़े लोगों को अचानक बड़ी ख्याति या कोई नया प्रोजेक्ट मिल सकता है।
वक्री शनि (छठा भाव): छठे भाव में वक्री शनि आपके लिए सबसे बड़े रक्षक सिद्ध होंगे। यह समय पुराने कर्जों से मुक्ति पाने और क्रॉनिक (पुरानी) बीमारियों में सुधार देखने का है।
सटीक उपाय: शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करें और सरसों के तेल का दीपक पीपल के वृक्ष के पास जलाएं।
मकर राशि (Capricorn)
मंगल-गुरु युति (सातवां भाव): वैवाहिक जीवन में यदि पुराने मतभेद थे, तो वे गुरु की अमृत दृष्टि से समाप्त होंगे। व्यापारिक साझेदारी (Partnership) से बड़ा आर्थिक लाभ होने के योग हैं।
चंद्र-राहु युति (दूसरा भाव): अचानक पैतृक संपत्ति का कोई पुराना विवाद सुलझ सकता है, जिससे धन की प्राप्ति होगी।
वक्री शनि (तीसरा भाव): शनि की साढ़ेसाती से मुक्त हो चुकी मकर राशि के लिए तीसरे भाव में वक्री शनि अत्यधिक शुभ हैं। यह आपके पराक्रम को बढ़ाकर आपको साहसिक फैसले लेने के लिए प्रेरित करेगा।
सटीक उपाय: शनिवार की शाम को किसी कुष्ठ रोगी या असहाय व्यक्ति को भोजन कराएं या ऊनी वस्त्र/चप्पल का दान करें।
अशुभ प्रभाव वाली राशियां
मिथुन राशि (Gemini)
मंगल-गुरु युति (दूसरा भाव): धन स्थान पर मंगल की नीच दृष्टि के कारण संचित धन (सेविंग्स) अचानक किसी पारिवारिक आपातकाल या बीमारी पर खर्च हो सकता है।
चंद्र-राहु युति (नौवां भाव): भाग्य भाव में ग्रहण दोष बनने से बनते हुए काम ऐन वक्त पर अटक जाएंगे। धार्मिक यात्राओं में बाधा आ सकती है और पिता के साथ वैचारिक मतभेद गहरे हो सकते हैं।
वक्री शनि (10वां भाव): कार्यक्षेत्र में बॉस या सहकर्मियों के साथ राजनीति का शिकार होना पड़ सकता है। आपकी मेहनत का श्रेय कोई और ले जा सकता है।
अशुभता निवारण उपाय: रोजाना पक्षियों को सात प्रकार का अनाज (सप्तधान्य) खिलाएं और बुधवार को ‘ॐ बुं बुधाय नमः’ मंत्र का जप करें।
सिंह राशि (Leo)
मंगल-गुरु युति (12वां भाव): बारहवें भाव में यह युति अनियंत्रित खर्चों को जन्म देगी। आपको बिना सोचे-समझे किसी को भी पैसा उधार देने से बचना चाहिए, अन्यथा वह पैसा डूब सकता है।
चंद्र-राहु युति (सातवां भाव): सातवें भाव में ग्रहण दोष वैवाहिक जीवन में भयंकर तूफान ला सकता है। जीवनसाथी के शक करने की आदत या गलतफहमी के कारण अलगाव जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
वक्री शनि (आठवां भाव): सिंह राशि पर शनि की ढैया चल रही है और शनि का वक्री होना पैरों में चोट, जोड़ों के दर्द या यूरिन इन्फेक्शन जैसी शारीरिक परेशानियां दे सकता है।
अशुभता निवारण उपाय: प्रत्येक शनिवार को काले तिल और लोहे की वस्तु का दान करें। रोज शाम को हनुमान चालीसा का दो बार पाठ करें।
वृश्चिक राशि (Scorpio)
मंगल-गुरु युति (नौवां भाव): उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को एकाग्रता की भारी कमी महसूस होगी। भाग्य का पासा अचानक पलट सकता है, जिससे निराशा हाथ लगेगी।
चंद्र-राहु युति (चौथा भाव): सुख स्थान पर लगा ग्रहण दोष घरेलू सुख-शांति को पूरी तरह भंग कर सकता है। माता के स्वास्थ्य को लेकर बड़ी चिंता बनी रहेगी। घर में सीलन या वाहन दुर्घटना की संभावना है।
वक्री शनि (पांचवां भाव): शनि की साढ़ेसाती के अंतिम चरण के कारण प्रेम संबंधों में कड़वाहट आ सकती है। शेयर मार्केट या सट्टेबाजी में बड़ा नुकसान हो सकता है।
अशुभता निवारण उपाय: मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में चमेली के तेल का दीपक जलाकर सिंदूर अर्पित करें।
धनु राशि (Sagittarius)
मंगल-गुरु युति (आठवां भाव): अष्टम भाव में नीच के मंगल की उपस्थिति वाहन दुर्घटना या अचानक सर्जरी (ऑपरेशन) के योग बनाती है। गुप्त शत्रुओं से बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है।
चंद्र-राहु युति (तीसरा भाव): छोटे भाई-बहनों के साथ संपत्ति को लेकर गंभीर विवाद हो सकता है। आपकी वाणी की आक्रामकता आपके सामाजिक संबंधों को खराब कर सकती है।
वक्री शनि (चौथा भाव): चतुर्थ भाव में शनि की ढैया चल रही है। वक्री शनि कार्यस्थल पर अत्यधिक मानसिक दबाव पैदा करेंगे, जिससे घर का माहौल भी तनावपूर्ण हो जाएगा।
अशुभता निवारण उपाय: गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करें, उसमें जल अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं।
कुंभ राशि (Aquarius)
मंगल-गुरु युति (छठा भाव): छठे भाव में मंगल कर्ज की स्थिति पैदा कर सकता है। शत्रुओं से निपटने में अत्यधिक ऊर्जा नष्ट होगी।
चंद्र-राहु युति (पहला/लग्न भाव): आपकी ही राशि में चंद्रमा और राहु का यह ग्रहण/जड़त्व योग बना हुआ है। यह आपको अत्यधिक भ्रमित, डिप्रेस्ड और नकारात्मक विचारों से भर देगा। सिरदर्द, माइग्रेन या मानसिक अशांति चरम पर हो सकती है।
वक्री शनि (पहला/लग्न भाव): आपकी राशि के स्वामी शनि देव स्वयं आपकी राशि में वक्री हैं और साढ़ेसाती का मध्य भाग चल रहा है। कार्यों में अत्यधिक देरी होगी और आलस्य के कारण सुनहरे अवसर हाथ से निकल सकते हैं।
अशुभता निवारण उपाय: प्रतिदिन शिव चालीसा का पाठ करें। शनिवार के दिन एक कटोरी सरसों के तेल में अपना चेहरा देखकर उसे किसी डाकौत या शनि मंदिर में दान करें (छाया दान)।
मीन राशि (Pisces)
मंगल-गुरु युति (पांचवां भाव): संतान के स्वास्थ्य या उसकी संगति को लेकर मन परेशान रहेगा। गर्भवती महिलाओं को इस समय अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा।
चंद्र-राहु युति (12वां भाव): बारहवें भाव में लगा ग्रहण दोष कोर्ट-कचहरी के मामलों में परेशानी बढ़ाएगा। अस्पताल के खर्चों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। रात को अनिद्रा (Insomnia) और अज्ञात भय सताएगा।
वक्री शनि (12वां भाव): मीन राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रथम चरण चल रहा है। शनि देव आपकी ही राशि में वक्री होकर आपके खर्चों, एकांतवास और मानसिक तनाव को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
अशुभता निवारण उपाय: हर शनिवार को पीपल के पेड़ की 7 परिक्रमा करें और जड़ में जल चढ़ाएं। ॐ शं शनैश्चराय नमः का जप करें और काले कपड़ों के प्रयोग से बचें।











































