न्यूजीलैंड के पूर्व सलामी बल्लेबाज जीत रावल ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। भारत में जन्मे 38 वर्षीय रावल ने 2016 से 2020 के बीच न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए 24 टेस्ट मैच खेले। क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद अब वह पेशेवर जीवन में नई शुरुआत करने जा रहे हैं। रावल ने बताया कि वह एक लेखा-परीक्षण कंपनी में पूर्णकालिक चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर काम करेंगे। क्रिकेट के मैदान पर लंबे समय तक अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले रावल का यह फैसला उनके करियर के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ-साथ न्यूजीलैंड के घरेलू क्रिकेट में भी उन्होंने लगातार प्रदर्शन किया और सलामी बल्लेबाज के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।
गुजरात से ऑकलैंड तक का सफर और पार्थिव पटेल से जुड़ा रिश्ता: जीत रावल का जन्म गुजरात में हुआ था। उनके शुरुआती क्रिकेट सफर का एक दिलचस्प पहलू यह है कि उन्होंने भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल के साथ अहमदाबाद के विद्यानगर स्कूल में पढ़ाई की थी। स्कूल के दिनों में दोनों खिलाड़ी साथ मिलकर पारी की शुरुआत भी किया करते थे। बाद में रावल का परिवार बेहतर भविष्य की उम्मीद में गुजरात से न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर में जाकर बस गया। वहां जीत ने क्रिकेट को आगे बढ़ाया और न्यूजीलैंड की अंडर-19 टीम का हिस्सा बनकर अपनी प्रतिभा दिखाई। वर्ष 2008 में उन्होंने ऑकलैंड की ओर से अपना पहला प्रथम श्रेणी मुकाबला खेला। भारत में जन्म लेने के बावजूद न्यूजीलैंड में क्रिकेट करियर बनाना उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा और आगे चलकर उन्होंने राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट पदार्पण और विश्व चैंपियन टीम का हिस्सा: घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन के बाद जीत रावल को वर्ष 2016 में न्यूजीलैंड की टेस्ट टीम में जगह मिली। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले से अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की और 2016 से 2020 के बीच कुल 24 टेस्ट मैच खेले। उनके करियर का एक यादगार पड़ाव वर्ष 2021 में आया, जब न्यूजीलैंड ने भारत को हराकर पहली बार विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब जीता। रावल उस विजेता टीम का हिस्सा थे। यह उपलब्धि न्यूजीलैंड क्रिकेट के इतिहास में महत्वपूर्ण मानी जाती है और रावल के करियर से जुड़ी खास यादों में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका सफर भले ही सीमित टेस्ट मैचों तक रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट में लंबे समय तक बल्लेबाजी करने और रन बनाने की उनकी क्षमता ने उन्हें न्यूजीलैंड के भरोसेमंद सलामी बल्लेबाजों में स्थान दिलाया।
संन्यास पर बोले रावल, न्यूजीलैंड के लिए खेलना बचपन का सपना था: क्रिकेट से विदाई के फैसले पर जीत रावल ने संतोष और गर्व जताया। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड की ओर से खेलना उनका बचपन का सपना था और अपने करियर को पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें खुशी होती है। रावल के मुताबिक, यह सपना केवल उनका ही नहीं, बल्कि उनके पिता का भी था। उनके पिता ने परिवार के बेहतर भविष्य और बेटे के क्रिकेटर बनने की उम्मीद में पूरे परिवार को न्यूजीलैंड ले जाने का फैसला किया था। रावल ने अपने संन्यास के निर्णय को सम्मान और संतुष्टि से जुड़ा कदम बताया। उनके बयान से स्पष्ट होता है कि क्रिकेट तक पहुंचने के लिए परिवार के फैसले और समर्थन की अहम भूमिका रही। अब वह खेल के मैदान से दूर रहकर अपने पेशेवर जीवन में लेखा और वित्त के क्षेत्र में नई जिम्मेदारियां संभालेंगे।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 10,127 रन और 23 शतक का रिकॉर्ड: जीत रावल न्यूजीलैंड के घरेलू क्रिकेट में प्रभावशाली सलामी बल्लेबाजों में गिने जाते रहे। उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी करियर की 292 पारियों में से 285 में पारी की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने लगभग 37 के औसत से कुल 10,127 रन बनाए और 23 शतक जड़े। न्यूजीलैंड की प्रमुख घरेलू प्रतियोगिता प्लंकेट शील्ड में भी उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा, जहां उन्होंने 8,662 रन बनाए। उनके आंकड़े बताते हैं कि घरेलू स्तर पर उन्होंने लंबे समय तक निरंतरता के साथ बल्लेबाजी की। सलामी बल्लेबाज के रूप में नई गेंद का सामना करना और टीम को मजबूत शुरुआत दिलाना उनके करियर की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहा। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में हजारों रन और दो दर्जन के करीब शतक उनके लंबे घरेलू अनुभव को दर्शाते हैं।
टेस्ट करियर में 1,143 रन, अब लेखा क्षेत्र में बनाएंगे पहचान: न्यूजीलैंड के लिए 24 टेस्ट मैच खेलने वाले जीत रावल ने 39 पारियों में 30.07 के औसत से 1,143 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से एक शतक और सात अर्धशतक निकले। अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के साथ घरेलू क्रिकेट में उनके बड़े रन-संग्रह ने उनके करियर को मजबूती दी। अब संन्यास के बाद वह एक लेखा-परीक्षण कंपनी में पूर्णकालिक चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में काम करेंगे। क्रिकेट से पेशेवर जीवन के दूसरे क्षेत्र में जाने का उनका फैसला एक नई शुरुआत है। रावल ने अपने खेल करियर को संतोष के साथ समाप्त करने की बात कही है और अब वह अपनी शैक्षणिक तथा पेशेवर योग्यता का उपयोग लेखा क्षेत्र में करेंगे। इस तरह न्यूजीलैंड के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में योगदान देने के बाद जीत रावल अपने जीवन के अगले अध्याय की ओर बढ़ रहे हैं।















































