सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हूती विद्रोहियों के हमले के बाद अमेरिका की संभावित सैन्य भूमिका को लेकर हलचल बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि उनका देश सऊदी अरब के साथ मिलकर यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने पर विचार कर सकता है। रियाद के हवाई अड्डे पर हुए हमले में कम से कम बारह लोगों की मौत और तीन सौ से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। घटना के बाद हवाई अड्डे से उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इस हमले ने सऊदी अरब की सुरक्षा और क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
ट्रंप बोले, फैसला लेकर तेजी से उठाएंगे कदम: अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि सऊदी अरब पर हुए हालिया हमले की जानकारी उन्हें अभी मिली है और अमेरिका इस मामले में आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा। ट्रंप ने सैन्य अभियान में शामिल होने की संभावना को खारिज नहीं किया और कहा कि स्थिति का आकलन करने के बाद फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि निर्णय होने पर तेजी से कदम उठाए जा सकते हैं। उनके बयान से यह स्पष्ट हुआ है कि सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर अमेरिका विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि संभावित कार्रवाई का स्वरूप क्या होगा, इसमें अमेरिकी सेना की प्रत्यक्ष भागीदारी होगी या सऊदी अरब को किसी अन्य प्रकार की सैन्य सहायता दी जाएगी।
रियाद हवाई अड्डे पर मिसाइल गिरने से भारी नुकसान: सऊदी अधिकारियों के अनुसार, राजधानी रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में बारह लोगों की जान गई और तीन सौ से अधिक लोग घायल हुए। एक क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि शनिवार को हूती विद्रोहियों की ओर से दागी गई मिसाइल हवाई अड्डे के उस परिसर में गिरी, जहां घरेलू उड़ानों के टर्मिनल तीन और चार मौजूद हैं। हमले में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और कुछ की हालत गंभीर बताई गई है। मृतकों में चार सऊदी नागरिकों के अलावा बांग्लादेश, फिलिस्तीन, अमेरिका, मिस्र, जॉर्डन, सीरिया और सूडान के नागरिक शामिल हैं। घटना के बाद हवाई अड्डे का संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया, जिससे यात्रियों और विमान सेवाओं पर असर पड़ा है।
इस सप्ताह तीसरी बार हवाई अड्डे को बनाया गया निशाना: रियाद का यह हवाई अड्डा पहले भी हूती विद्रोहियों के हमलों का सामना कर चुका है। इस सप्ताह यहां हुआ हमला तीसरी ऐसी घटना बताया गया है, लेकिन इस बार जनहानि अधिक होने की जानकारी सामने आई है। हवाई अड्डे जैसे महत्वपूर्ण नागरिक ठिकाने पर मिसाइल गिरने से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई है। इसके साथ ही सऊदी अरब के दूसरे हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और तेल से संबंधित बुनियादी ढांचे पर भी हमले किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं के चलते सऊदी अरब के लिए अपने प्रमुख ठिकानों की सुरक्षा मजबूत करना बड़ी चुनौती बन गया है। लगातार हो रहे हमलों से क्षेत्र में तनाव बढ़ने और संघर्ष के दायरे के विस्तार की आशंका भी गहरा रही है।
यमन में सैन्य अभियान के बीच बढ़ा टकराव: सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया है। इसके बाद हूतियों की ओर से सऊदी अरब को निशाना बनाने की घटनाएं तेज होने की जानकारी दी गई है। हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त बताया जाता है, इसलिए उनके खिलाफ संभावित अमेरिकी कार्रवाई का मामला केवल सऊदी अरब और यमन तक सीमित नहीं रह सकता। ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है, जब हवाई अड्डों और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमलों ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है। यदि अमेरिका सैन्य अभियान में शामिल होने का फैसला करता है, तो क्षेत्र में पहले से जारी संघर्ष और जटिल हो सकता है। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन की ओर से किसी निश्चित सैन्य योजना या कार्रवाई की समयसीमा का विवरण सामने नहीं आया है।
भारतीयों के लिए सतर्कता और आधिकारिक निर्देशों का पालन जरूरी: सऊदी अरब में लगातार हो रहे हमलों के बीच वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है। इससे पहले अभहा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिसाइल हमलों के बाद भारतीय दूतावास ने परामर्श जारी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी थी। दूतावास ने आवश्यकता पड़ने पर घरों के भीतर रहने और स्थानीय अधिकारियों के आधिकारिक निर्देशों का पालन करने को कहा था। रियाद में ताजा हमले के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर निगरानी बनाए रखना जरूरी हो गया है। आने वाले समय में सऊदी अरब की सैन्य प्रतिक्रिया और अमेरिका के संभावित फैसले पर नजर रहेगी, क्योंकि इन दोनों का असर क्षेत्र में सुरक्षा हालात और आगे के घटनाक्रम पर पड़ सकता है।














































