ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। सामने आई जानकारी में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं और इसकी शुरुआत 27 अक्टूबर को होने वाले इजरायली चुनाव से पहले हो सकती है। यह आशंका ऐसे समय में उभरी है, जब कूटनीतिक बातचीत ठप पड़ी है और मध्य पूर्व की दिशा में अमेरिकी सैन्य संसाधनों की तैनाती बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। इससे खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष फिर तेज होने की चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला करने की किसी योजना से इनकार किया है। इस तरह संभावित सैन्य अभियान को लेकर एक तरफ तैयारी के दावे हैं, तो दूसरी तरफ तत्काल हमले की संभावना को खारिज करने वाला आधिकारिक बयान भी मौजूद है।
राष्ट्रपति ट्रंप की मंजूरी और अमेरिकी कमान की तैयारियों पर नजर: एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर शुरू करने की मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसी संभावित फैसले को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी सेना क्षेत्र में संसाधन तैनात कर रही है। अधिकारी के मुताबिक, अमेरिकी केंद्रीय कमान व्यापक युद्ध अभियान दोबारा शुरू करने के लिए आवश्यक तैयारियां कर रही है। हालांकि, अधिकारी ने यह निश्चित नहीं माना कि हमला इजरायली चुनाव से पहले ही शुरू हो जाएगा। उन्होंने पिछले अभियान ‘एपिक फ्यूरी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय सभी संसाधनों की पूरी तैयारी किए बिना ही सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। इस टिप्पणी से संकेत मिलता है कि अमेरिकी सैन्य नेतृत्व पिछली परिस्थितियों से सबक लेते हुए इस बार तैयारी को लेकर अलग रुख अपना सकता है। फिर भी, राष्ट्रपति की मंजूरी, हमले की तारीख और अभियान के वास्तविक दायरे को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अरब सागर में पहले से मौजूद युद्धपोतों के बीच अतिरिक्त बलों की आवाजाही: अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के तहत विमानवाहक पोत यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट और तेरहवीं मरीन अभियान इकाई मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहे हैं। इनके साथ लगभग दस हजार अतिरिक्त नौसैनिकों और मरीन सैनिकों की तैनाती की जानकारी दी गई है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका के दो और विमानवाहक पोत पहले से अरब सागर में मौजूद बताए गए हैं। इतने बड़े सैन्य संसाधनों की मौजूदगी क्षेत्र में अमेरिकी बलों की क्षमता और तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण संकेत देती है। संभावित सैन्य अभियान के संदर्भ में अतिरिक्त सैनिकों और युद्धपोतों की आवाजाही से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अमेरिका किसी बड़े टकराव के लिए अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। हालांकि, सैन्य तैनाती अपने आप में हमले की पुष्टि नहीं करती और अमेरिकी प्रशासन ने चुनाव से पहले ईरान पर कार्रवाई की खबर को नकारा है। इस विरोधाभासी स्थिति के बीच क्षेत्रीय देशों और सैन्य गतिविधियों पर नजर बनी हुई है।
व्हाइट हाउस का इनकार, लेकिन सैन्य तैयारी को लेकर सवाल बरकरार: अमेरिकी प्रशासन ने ईरान पर जल्द हमले की खबरों को स्वीकार नहीं किया है। व्हाइट हाउस की प्रधान उप प्रेस सचिव अन्ना केली ने कहा कि अमेरिका मध्यावधि चुनाव से पहले किसी भी समय ईरान पर हमला नहीं करेगा। यह बयान उस जानकारी से अलग है, जिसमें बड़े सैन्य अभियान की तैयारी और संसाधनों की तैनाती का उल्लेख किया गया है। प्रशासन के इनकार के बावजूद क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक प्रक्रिया में रुकावट के कारण स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सैन्य संसाधनों को भेजने का उद्देश्य संभावित अभियान के लिए तैयारी करना है, ईरान पर दबाव बढ़ाना है या किसी अन्य सुरक्षा परिस्थिति से निपटना है। इसलिए हमले को तय मानने के बजाय उपलब्ध दावों और आधिकारिक बयान के बीच अंतर समझना जरूरी है। फिलहाल अमेरिकी पक्ष ने चुनाव से पहले हमले की योजना से साफ इनकार किया है, जबकि सैन्य तैयारियों से जुड़ी रिपोर्ट ने क्षेत्रीय तनाव को फिर चर्चा में ला दिया है।
जनरल मोहसेन रेजाई ने दी व्यापक जवाबी कार्रवाई की चेतावनी: ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी जनरल मोहसेन रेजाई ने कहा है कि उनका देश पूरे क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्य संसाधनों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन इस्तेमाल करने की क्षमता रखता है। उन्होंने चेताया कि यदि संघर्ष दोबारा शुरू हुआ तो ईरान के पास व्यापक जवाबी योजना होगी और उसके खिलाफ किसी भी सैन्य कदम की कीमत बहुत भारी पड़ सकती है। रेजाई ने कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात भी कही। उनके अनुसार, यदि बातचीत के जरिए विवाद सुलझाया जा सकता है तो ईरान उसी रास्ते को अपनाना चाहेगा, लेकिन युद्ध जारी रहने की स्थिति में वह जवाब देने के लिए तैयार है। इस बयान से ईरान की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई के खिलाफ कड़ा संदेश दिया गया है। तेहरान की चेतावनी यह भी दर्शाती है कि वह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को संभावित टकराव के संदर्भ में देख रहा है और संघर्ष की स्थिति में अमेरिकी संसाधनों को निशाना बनाने की बात खुलकर रख रहा है।
ईरानी खुफिया आकलन में बमबारी का खतरा, युद्ध होने पर भारी नुकसान की चेतावनी: ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि तेहरान के खुफिया आकलन के अनुसार, इजरायल में मतदान से पहले बड़े पैमाने पर बमबारी होने की प्रबल आशंका है। अधिकारी ने वार्ता रुकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख को जिम्मेदार बताया और कहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर कोई कदम नहीं उठाया गया, जिसके चलते बातचीत ठप हो गई। उन्होंने यह भी चेताया कि यदि ईरान के खिलाफ फिर युद्ध शुरू होता है तो जान-माल का नुकसान बहुत ज्यादा होगा। अधिकारी के दावे के अनुसार, क्षेत्र के देशों में अमेरिकी सेना की तैनाती को देखते हुए इस बार अमेरिकी पक्ष का नुकसान पहले से दस गुना तक अधिक हो सकता है। यह आंकड़ा ईरानी अधिकारी का अनुमान है, न कि स्वतंत्र रूप से पुष्ट परिणाम। फिलहाल कूटनीतिक बातचीत में गतिरोध, अमेरिका की सैन्य तैनाती और ईरान की जवाबी कार्रवाई की चेतावनी ने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है।














































