17 अक्टूबर 2026, शनिवार को शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन है। इस दिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी और मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। सुबह मूल नक्षत्र के बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का आरंभ होगा। दिन में रवि योग का संयोग भी बनेगा, जबकि रात में अतिगण्ड योग समाप्त होकर सुकर्मा योग शुरू होगा। शाम को सूर्य के तुला राशि में प्रवेश के साथ तुला संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा। यहां जानिए शनिवार के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग, करण, शुभ-अशुभ मुहूर्त, चौघड़िया, सूर्योदय-चंद्रास्त और राहुकाल से जुड़ी प्रमुख जानकारियां।
मुख्य पंचांग विवरण
दिन: शनिवार
विक्रम संवत: 2083, सिद्धार्थी
शक संवत: 1948, पराभव
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: शरद ऋतु
मास: आश्विन मास
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: सप्तमी, 18 अक्टूबर को सुबह लगभग 8:28 बजे तक
नक्षत्र: मूल, सुबह 9:47 बजे तक; इसके बाद पूर्वाषाढ़ा
योग: अतिगण्ड, रात लगभग 11:03 बजे तक; इसके बाद सुकर्मा
करण: गर, शाम लगभग 7:11 बजे तक; इसके बाद वणिज
सूर्य राशि: कन्या, शाम लगभग 7:57 बजे तक; इसके बाद तुला
चंद्र राशि: धनु
संक्रांति: तुला संक्रांति,आज शाम लगभग 7:57 बजे कल (18 अक्टूबर 2026 संक्रांति) का सूर्योदय तुला राशि में ही होगा।तुला संक्रांति का स्नान, पूजा और पुण्य काल कल (18 अक्टूबर, 2026 रविवार) सुबह से दोपहर तक मनाया जाएगा।
विशेष: शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन, महासप्तमी, मां कालरात्रि पूजा और तुला संक्रांति
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:27 बजे से 5:17 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 4:52 बजे से 6:07 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:28 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:46 बजे से 2:32 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:36 बजे से 6:01 बजे तक
सायाह्न संध्या: शाम 5:36 बजे से 6:51 बजे तक
रवि योग: सुबह 6:07 बजे से 9:47 बजे तक
अमृत काल: उपलब्ध पंचांग गणना में अलग से पुष्ट समय नहीं मिला।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: सुबह 8:59 बजे से 10:25 बजे तक
यमगण्ड काल: दोपहर 1:18 बजे से 2:44 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 6:07 बजे से 7:33 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह 6:07 बजे से 6:53 बजे तक तथा सुबह 6:53 बजे से 7:39 बजे तक
वर्ज्य काल: सुबह 7:59 बजे से 9:47 बजे तक तथा रात 8:35 बजे से 10:24 बजे तक
आडल योग: सुबह 9:47 बजे के बाद अगले दिन सुबह तक
विडाल योग: सुबह 6:07 बजे से 9:47 बजे तक
गंडमूल: मूल नक्षत्र के कारण सुबह 9:47 बजे तक
दिशाशूल: पूर्व दिशा
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय
सूर्योदय: सुबह 6:07 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:36 बजे
चन्द्रोदय: रात 8:07 बजे
चन्द्रास्त: सुबह 6:20 बजे
दिन की चौघड़िया
काल (सामान्य): सुबह 6:07 बजे से 7:33 बजे तक
शुभ (उत्तम): सुबह 7:33 बजे से 8:59 बजे तक
रोग (अशुभ): सुबह 8:59 बजे से 10:25 बजे तक
उद्वेग (अशुभ): सुबह 10:25 बजे से 11:51 बजे तक
चर (सामान्य): सुबह 11:51 बजे से दोपहर 1:18 बजे तक
लाभ (उन्नति): दोपहर 1:18 बजे से 2:44 बजे तक
अमृत (सर्वोत्तम): दोपहर 2:44 बजे से शाम 4:10 बजे तक
काल (सामान्य): शाम 4:10 बजे से 5:36 बजे तक
रात्रि की चौघड़िया
लाभ (उन्नति): शाम 5:36 बजे से 7:10 बजे तक
उद्वेग (अशुभ): शाम 7:10 बजे से 8:44 बजे तक
शुभ (उत्तम): रात 8:44 बजे से 10:18 बजे तक
अमृत (सर्वोत्तम): रात 10:18 बजे से 11:52 बजे तक
चर (सामान्य): रात 11:52 बजे से अगले दिन रात 1:26 बजे तक
रोग (अशुभ): रात 1:26 बजे से 3:00 बजे तक
काल (सामान्य): रात 3:00 बजे से 4:34 बजे तक
लाभ (उन्नति): सुबह 4:34 बजे से 6:07 बजे तक
राज्यवार राहुकाल
| क्रमांक | राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | राजधानी | राहुकाल समय |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | लखनऊ | सुबह 9:02–10:28 बजे |
| 2 | दिल्ली | नई दिल्ली | सुबह 9:15–10:40 बजे |
| 3 | जम्मू-कश्मीर | श्रीनगर/जम्मू | सुबह 9:22–10:48 बजे |
| 4 | आंध्र प्रदेश | अमरावती | सुबह 8:58–10:26 बजे |
| 5 | अरुणाचल प्रदेश | ईटानगर | सुबह 7:56–9:22 बजे |
| 6 | असम | दिसपुर | सुबह 8:06–9:32 बजे |
| 7 | बिहार | पटना | सुबह 8:39–10:05 बजे |
| 8 | छत्तीसगढ़ | रायपुर | सुबह 8:52–10:19 बजे |
| 9 | गोवा | पणजी | सुबह 9:22–10:51 बजे |
| 10 | गुजरात | गांधीनगर | सुबह 9:34–11:01 बजे |
| 11 | हरियाणा | चंडीगढ़ | सुबह 9:18–10:44 बजे |
| 12 | हिमाचल प्रदेश | शिमला | सुबह 9:17–10:43 बजे |
| 13 | झारखंड | रांची | सुबह 8:42–10:09 बजे |
| 14 | कर्नाटक | बेंगलुरु | सुबह 9:07–10:36 बजे |
| 15 | केरल | तिरुवनंतपुरम | सुबह 9:09–10:39 बजे |
| 16 | मध्य प्रदेश | भोपाल | सुबह 9:14–10:41 बजे |
| 17 | महाराष्ट्र | मुंबई | सुबह 9:28–10:55 बजे |
| 18 | मणिपुर | इंफाल | सुबह 7:54–9:20 बजे |
| 19 | मेघालय | शिलांग | सुबह 8:08–9:34 बजे |
| 20 | मिजोरम | आइजोल | सुबह 7:56–9:22 बजे |
| 21 | नागालैंड | कोहिमा | सुबह 7:52–9:18 बजे |
| 22 | ओडिशा | भुवनेश्वर | सुबह 8:38–10:05 बजे |
| 23 | पंजाब | चंडीगढ़ | सुबह 9:19–10:45 बजे |
| 24 | राजस्थान | जयपुर | सुबह 9:24–10:51 बजे |
| 25 | सिक्किम | गंगटोक | सुबह 8:21–9:47 बजे |
| 26 | तमिलनाडु | चेन्नई | सुबह 8:57–10:26 बजे |
| 27 | तेलंगाना | हैदराबाद | सुबह 9:02–10:30 बजे |
| 28 | त्रिपुरा | अगरतला | सुबह 8:02–9:28 बजे |
| 29 | उत्तराखंड | देहरादून | सुबह 9:13–10:39 बजे |
| 30 | पश्चिम बंगाल | कोलकाता | सुबह 8:27–9:54 बजे |
नवरात्रि की सप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा का महत्व
शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। देवी का स्वरूप उग्र दिखाई देता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में उन्हें भक्तों की रक्षा करने वाली और भय दूर करने वाली शक्ति के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि की उपासना से साहस, आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं, देवी को प्रसाद अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-शांति तथा मंगल की कामना करते हैं। नवरात्रि की सप्तमी पर मां की आराधना के साथ संयम, सेवा और सकारात्मक आचरण को भी विशेष महत्व दिया जाता है।











































