अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से जुड़े व्यापार पर प्रस्तावित शुल्कों और कई प्रतिबंधों को फिलहाल लागू नहीं करने का आदेश दिया है। शुक्रवार देर रात जारी इस आदेश के तहत उन्होंने ग्राहम अधिनियम के प्रावधानों से छूट देने की घोषणा की। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस को प्रमाण पत्र दिया है, जिसमें मौजूदा समय में इस छूट को अमेरिका के राष्ट्रीय हित में बताया गया है। इस निर्णय से भारत और चीन जैसे देशों को तत्काल राहत मिली है, क्योंकि रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण इन देशों पर अमेरिकी शुल्क लगाए जाने का खतरा था। हालांकि, आदेश में शुल्कों को स्थायी रूप से समाप्त नहीं किया गया है। इन्हें फिलहाल रोकने का फैसला लिया गया है और भविष्य में इन्हें दोबारा लागू करने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति के पास बना हुआ है।
रूस के पांच प्रमुख तेल खरीदार देशों पर था शुल्क का खतरा: ग्राहम अधिनियम के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के कच्चे तेल के पांच प्रमुख खरीदार देशों से आने वाले सभी सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया था। इस सूची में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल थे। कानून के अनुसार, ट्रंप को हस्ताक्षर के बाद 30 दिनों के भीतर इस संबंध में कदम उठाने थे। एक महीने की निर्धारित अवधि 18 अक्टूबर को समाप्त होने वाली थी। प्रस्तावित शुल्कों का असर उन देशों के निर्यात पर पड़ सकता था, जो अमेरिकी बाजार में अपने उत्पाद बेचते हैं। भारत के लिए यह प्रावधान विशेष रूप से महत्वपूर्ण था, क्योंकि रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में भारत भी शामिल है। ताजा आदेश ने इस संभावित शुल्क व्यवस्था को फिलहाल रोक दिया है और तत्काल आर्थिक दबाव से राहत दी है।
यूक्रेन युद्ध के लिए रूस के वित्तीय संसाधन घटाना था कानून का उद्देश्य: लिंडसे ओ. ग्राहम के नाम पर बने इस कानून का मुख्य लक्ष्य रूस की उन आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाना था, जो यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने में मदद करती हैं। इसके तहत रूसी अधिकारियों, बैंकों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं को प्रतिबंधों के दायरे में लाने की व्यवस्था की गई थी। साथ ही, रूस के सैन्य अभियानों का समर्थन करने वाली विदेशी इकाइयों को भी निशाना बनाने का प्रावधान रखा गया था। कानून बनाने के पीछे यह उद्देश्य था कि रूस की आय और वित्तीय संसाधनों पर असर डालकर उसकी युद्ध संबंधी गतिविधियों को आर्थिक समर्थन मिलने की क्षमता कम की जाए। इसी रणनीति के तहत रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भी दबाव बनाने का रास्ता तैयार किया गया था, ताकि वे रूसी तेल और गैस पर अपनी निर्भरता घटाएं।
रूसी ऊर्जा उत्पादों पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की व्यवस्था: ग्राहम अधिनियम में रूस से अमेरिका आने वाले ऊर्जा उत्पादों पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान भी शामिल था। इसके अतिरिक्त, कई रूसी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था की गई थी। इन प्रावधानों का उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई को सीमित करना और उसके आर्थिक तंत्र पर दबाव बढ़ाना था। कानून में केवल रूस को सीधे निशाना बनाने की व्यवस्था नहीं थी, बल्कि उन देशों पर भी शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया था जो उसके साथ व्यापार करते हैं। इस तरह रूस से तेल खरीदने वाले देशों को भी अमेरिकी आर्थिक कदमों के संभावित प्रभावों का सामना करना पड़ सकता था। भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों के लिए इसी प्रावधान ने चिंता बढ़ाई थी।
ट्रंप ने राष्ट्रीय हित का हवाला देकर दी अस्थायी छूट: शुक्रवार देर रात जारी कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह ग्राहम अधिनियम के तहत प्रस्तावित शुल्कों और प्रतिबंधों को लागू करने से फिलहाल छूट दे रहे हैं। उन्होंने इस फैसले के समर्थन में अमेरिकी कांग्रेस को प्रमाण पत्र सौंपा और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस आदेश से तत्काल शुल्क लागू करने की प्रक्रिया रुक गई है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में इस छूट के पीछे किसी अन्य विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि अमेरिकी प्रशासन ने रूस से जुड़े व्यापार पर अपना रुख स्थायी रूप से बदल दिया है। फिलहाल स्पष्ट बात यही है कि प्रस्तावित उपायों को लागू नहीं किया जा रहा है, जबकि भविष्य में इन्हें फिर से लागू करने का विकल्प खुला है।
भारत के लिए राहत, लेकिन आगे की नीति पर बनी रहेगी नजर: ट्रंप के फैसले से भारत को तत्काल राहत मिली है, क्योंकि रूस से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिकी शुल्कों का खतरा फिलहाल टल गया है। चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान सहित अन्य संबंधित देशों को भी प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था से अस्थायी राहत मिली है। इसके बावजूद कानून के प्रावधान समाप्त नहीं हुए हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति भविष्य में शुल्क दोबारा लागू कर सकते हैं। ग्राहम अधिनियम के तहत रूस की ऊर्जा आय, सरकारी संस्थाओं और उसके साथ व्यापार करने वाले देशों पर दबाव बनाने की व्यवस्था की गई थी। ऐसे में भारत के लिए अमेरिकी प्रशासन के आगामी फैसले महत्वपूर्ण बने रहेंगे। मौजूदा आदेश ने तत्काल जोखिम कम किया है, लेकिन शुल्कों को लेकर भविष्य की स्थिति अमेरिकी सरकार के अगले निर्णयों पर निर्भर करेगी।













































