अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम के प्रयासों के बावजूद इजरायल और लेबनानी आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई लगातार तेज होती जा रही है। इन दोनों पक्षों के बीच बढ़ता सैन्य टकराव क्षेत्र में शांति स्थापित करने की कोशिशों के सामने एक नई और बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। इजरायली सेना और हिजबुल्लाह के लड़ाके एक-दूसरे के ठिकानों पर लगातार भारी और आक्रामक हमले कर रहे हैं। इस बढ़ते हिंसक टकराव के कारण पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता की स्थिति अत्यधिक नाजुक और चिंताजनक हो गई है। दोनों तरफ से जारी इस भारी गोलीबारी ने क्षेत्र में एक बड़े पूर्णकालिक युद्ध की आशंका को बहुत बढ़ा दिया है।
समझौते पर खतरा: इजरायल और लेबनानी आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह के बीच तेज होती यह लड़ाई केवल उनके आपसी विवाद तक ही सीमित नहीं है। इस भीषण सैन्य टकराव के कारण अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्धविराम को आगे बढ़ाने के उभरते समझौते को लेकर लगातार एक बड़ा खतरा पैदा हो रहा है। दोनों महाशक्तियों के बीच शांति स्थापित करने के जो प्रयास किए जा रहे थे, वे इस नई हिंसा के कारण पूरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। हिजबुल्लाह और इजरायल के हमले अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत के माहौल को लगातार बिगाड़ रहे हैं। इस क्षेत्रीय युद्ध के चलते अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले किसी भी संभावित शांति समझौते के खटाई में पड़ने की आशंका मजबूत हो गई है।
ट्रंप की मध्यस्थता: इस गहराते संकट और भीषण सैन्य हिंसा के बीच सोमवार दोपहर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ इस पूरे गंभीर विषय पर बहुत विस्तार से बातचीत की है। इसके साथ ही अमेरिकी प्रशासन ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के माध्यम से लेबनानी आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह से भी सीधा संपर्क स्थापित करने की कोशिश की है। इन उच्च स्तरीय कूटनीतिक वक्ताओं और संपर्कों के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि दोनों पक्ष लड़ाई को कम करने के लिए सहमत हो गए हैं। इस अमेरिकी मध्यस्थता के बाद वैश्विक समुदाय को यह उम्मीद जगी थी कि शायद अब इस क्षेत्र में हिंसा का दौर पूरी तरह थम जाएगा।
दावे के बाद हमला: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लड़ाई कम होने की इस सकारात्मक घोषणा के कुछ ही क्षणों बाद जमीन पर हालात पूरी तरह बदल गए। इस शांति के दावे के ठीक बाद इजरायल ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि उसने लेबनान की सीमा से एक मिसाइल प्रक्षेपण का पता लगाया है। लेबनान की तरफ से दागी गई इस मिसाइल के कारण शांति और युद्धविराम के सभी दावों को एक बहुत बड़ा और तत्काल झटका लगा है। इस नए मिसाइल हमले ने यह साबित कर दिया है कि कूटनीतिक घोषणाओं के बावजूद जमीन पर हिंसा थमती हुई नजर नहीं आ रही है। इस अप्रत्याशित हमले के बाद इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी इस खूनी संघर्ष के और अधिक उग्र होने की संभावना बढ़ गई है।
नागरिकों को चेतावनी: लेबनान से हुए इस मिसाइल हमले के तुरंत बाद इजरायली सरकार और सैन्य अधिकारियों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से हाई अलर्ट पर रख दिया है। प्रशासन ने उत्तरी इजरायल के कुछ विशिष्ट हिस्सों में रहने वाले सभी इजरायलियों के लिए एक बेहद गंभीर और जरूरी चेतावनी जारी की है। इस चेतावनी में वहां के आम नागरिकों को बिना कोई देरी किए तुरंत अपने नजदीकी सुरक्षित स्थानों और बंकरों में शरण लेने के लिए कहा गया है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए सैन्य निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें। उत्तरी क्षेत्रों में सायरन की आवाज और इस सैन्य चेतावनी के बाद से आम इजरायली नागरिकों के बीच भारी डर और अफरा-तफरी का माहौल देखा जा रहा है।
शांति पर संशय: इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हुई इस ताजा सैन्य घटना ने मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति की मध्यस्थता और दावों के तुरंत बाद हुआ यह हमला यह दर्शाता है कि संघर्ष के समाधान की राह अभी बेहद अनिश्चित है। जब तक जमीनी स्तर पर दोनों पक्ष पूरी तरह से युद्धविराम का पालन नहीं करते, तब तक किसी भी कूटनीतिक समझौते का टिक पाना असंभव है। इस ताजा मिसाइल हमले के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले युद्धविराम विस्तार समझौते के भविष्य पर भी काले बादल मंडराने लगे हैं। वैश्विक समुदाय अब इस पूरे घटनाक्रम को बेहद करीब से देख रहा है कि आने वाले दिनों में यह तनाव क्या मोड़ लेता है।





































