शाहिद अख्तर के जनाजे में आतंकियों की मौजूदगी ने सिस्टम को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। इस चौंकाने वाली घटना ने साबित कर दिया है कि वहां आतंकी बेखौफ होकर घूमते हैं। यह देश अभी भी दुनिया भर के आतंकवादियों के लिए एक बहुत सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है। प्रतिबंधित संगठनों के नेता सरेआम रैलियों और जनाजों में बिना किसी डर के शामिल होते हैं। इससे यह बात पूरी तरह साफ हो जाती है कि प्रशासन इन आतंकियों पर पूरी तरह मेहरबान है।
सरकारी नेताओं के साथ मंच साझा आतंकी संगठनों के नेताओं की पहुंच सीधे तौर पर बड़े सरकारी महकमे तक नजर आती है। इसी साल अप्रैल के महीने में तल्हा सईद को एक बड़े पब्लिक इवेंट में देखा गया था। उसने प्रधानमंत्री के स्पेशल असिस्टेंट राणा सनाउल्लाह के साथ मंच साझा किया था। इस कार्यक्रम के दौरान दोनों के बीच काफी लंबे समय तक गंभीर बातचीत भी हुई थी। किसी आतंकी सरगना के बेटे का सरकारी अधिकारी के साथ मिलना एक बेहद चिंताजनक मामला है।
भारत की लगातार जताई गई चिंता भारत सरकार ने सीमा पार से आतंकियों को मिल रही मदद पर हमेशा अपनी गंभीर चिंता जताई है। भारत ने बार-बार कहा है कि पड़ोसी देश आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने मुहैया करा रहा है। इन ठिकानों से भारत को निशाना बनाने वाले खूंखार आतंकवादियों को पूरी मदद मिलती है। भारत ने यूनाइटेड नेशंस समेत दुनिया की सभी बड़ी संस्थाओं से कड़ी कार्रवाई की अपील की है। इसके बावजूद वहां की व्यवस्था में कोई भी ठोस सुधार आज तक देखने को नहीं मिला है।
अमेरिकी रिपोर्ट ने खोली पोल भारत के अलावा अमेरिका ने भी अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में आतंकवाद की पोल खोली है। मार्च के महीने में अमेरिका की कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस ने एक अहम रिपोर्ट पब्लिश की थी। पच्चीस मार्च को जारी की गई इस रिपोर्ट में देश को आतंकियों की पनाहगाह बताया गया था। रिपोर्ट के अनुसार यह देश खास तौर पर भारत विरोधी आतंकियों को पूरी खुली छूट देता है। इस अमेरिकी दस्तावेज ने आतंकवाद को पालने वाली नीति को दुनिया के सामने बेनकाब किया है।
कार्रवाई करने में पूरी तरह नाकाम इस विस्तृत अमेरिकी रिपोर्ट में प्रशासन की घोर नाकामी को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार आतंकी गुटों पर पर्याप्त कार्रवाई करने में नाकाम रही है। कुछ विशेष आतंकवादी संगठनों और उनके नेताओं को देश में खुलेआम काम करने से नहीं रोका गया। सरकार की यह ढील आतंकियों को बेखौफ होकर अपनी योजनाएं बनाने का पूरा मौका देती है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद वहां अपने देश में आतंकवाद को जड़ से खत्म नहीं किया जा सका है।
प्रतिबंधों का नहीं हो रहा असर आतंकी संगठनों पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध सिर्फ दिखावे के लिए ही सीमित रह गए हैं। जमात-उद-दावा जैसे प्रतिबंधित संगठन नए राजनीतिक नाम रखकर अपना काम बेखौफ कर रहे हैं। पीएमएमएल जैसे नए संगठन बनाकर ये आतंकी नेता खुद को सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पेश करते हैं। सरकार सब कुछ जानते हुए भी इन खतरनाक लोगों के खिलाफ कोई भी कड़ा एक्शन नहीं लेती है। यही वजह है कि आज भी वहां आतंकी पूरी आजादी के साथ हर जगह खुलेआम घूमते हैं।





































