दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर फैल गई है। उनके जाने पर शाहरुख खान, सलमान खान, अक्षय कुमार और मनीषा कोइराला सहित कई कलाकारों ने दुख व्यक्त किया। संगीत जगत के दिग्गज उस्ताद अमजद अली खान ने भी नाना पाटेकर को याद करते हुए भावुक प्रतिक्रिया दी और उनके प्रति अपना सम्मान जाहिर किया। इसी बीच अभिनेता और कार्यक्रम प्रस्तोता शेखर सुमन ने नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देने के लिए अपने कार्यक्रम ‘शेखर टुनाइट’ के पहले सत्र का समापन समारोह रद्द करने का फैसला किया है। शेखर के मुताबिक, नाना पाटेकर इस कार्यक्रम के अंतिम अतिथि बनने वाले थे, लेकिन उनके निधन के कारण यह मुलाकात अब कभी नहीं हो सकेगी। ऐसे में शेखर ने तय किया कि कार्यक्रम का समापन किसी दूसरे अतिथि के साथ नहीं किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंतिम अतिथि बनने वाले थे नाना पाटेकर: शेखर सुमन ने बताया कि नाना पाटेकर ने स्वयं उनके कार्यक्रम में आने की इच्छा जताई थी और वह पहले सत्र के आखिरी मेहमान बनने वाले थे। शेखर इस मुलाकात को लेकर उत्साहित थे और उन्होंने कल्पना की थी कि दोनों पुराने साथी एक साथ बैठकर बातचीत करेंगे। लेकिन मुलाकात से पहले ही नाना पाटेकर के निधन की खबर आ गई। इस घटना ने शेखर को गहरे दुख में डाल दिया और उन्होंने कार्यक्रम का समापन समारोह रद्द करने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि वह नहीं चाहते कि नाना पाटेकर की जगह किसी दूसरे व्यक्ति को बैठाकर कार्यक्रम पूरा किया जाए। उनके लिए वह कुर्सी सिर्फ एक अतिथि की जगह नहीं, बल्कि उस मुलाकात की याद है जो होने वाली थी, लेकिन अधूरी रह गई। इसी वजह से उन्होंने इसे दिवंगत अभिनेता के प्रति सम्मान और श्रद्धांजलि के रूप में देखा।
शेखर सुमन ने भावुक संदेश में बयां किया अपना दुख: नाना पाटेकर को याद करते हुए शेखर सुमन ने अपने संदेश में लिखा कि नाना उनके सामने बैठने वाले थे और उन्हें इस तरह छोड़कर नहीं जाना चाहिए था। उन्होंने स्वीकार किया कि निधन की खबर को स्वीकार करना अब भी उनके लिए कठिन है। शेखर ने बताया कि उन्होंने सोचा था कि कार्यक्रम में दोनों हंसेंगे, मुस्कुराएंगे और कभी गंभीर खामोशी के बीच नाना के बेबाक तथा सच्चे जवाब सुनने को मिलेंगे। उन्हें नाना के खास अंदाज और ऊर्जा से भरी बातचीत की उम्मीद थी। शेखर के मन में यह कल्पना भी थी कि दो पुराने साथी बैठकर जिंदगी की तेजी से गुजरती हुई रफ्तार पर चर्चा करेंगे। लेकिन अब यह मुलाकात संभव नहीं है। उन्होंने अपने संदेश में खाली कुर्सी का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बार किसी की अनुपस्थिति इतनी कुछ कह जाती है, जिसे लंबी बातचीत भी व्यक्त नहीं कर सकती। उनके शब्दों में अधूरी रह गई मुलाकात का दर्द साफ झलकता है।
नाना पाटेकर की बेबाकी और सच्चाई को किया याद: शेखर सुमन ने नाना पाटेकर को केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि असाधारण व्यक्तित्व वाला इंसान बताया। उन्होंने लिखा कि नाना जिस सहजता से अपनी जिंदगी जीते थे और बिना किसी दिखावे के अपने मन की बात कहते थे, वही उन्हें खास बनाता था। उनके व्यक्तित्व में गुस्सा, हास्य, मस्ती, भावुकता और विद्रोही तेवर जैसे कई रंग मौजूद थे, लेकिन इन सबके ऊपर उनकी सच्चाई सबसे अलग थी। शेखर के मुताबिक, फिल्म जगत जैसे क्षेत्र में अपने वास्तविक व्यक्तित्व को बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन नाना ने किसी के लिए भी खुद को बदलने से इनकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि जिंदगी की सबसे कठिन सच्चाइयों में से एक यह है कि लोग अक्सर मानकर चलते हैं कि आगे कभी फोन पर बात हो जाएगी, फिर मुलाकात होगी या साथ बैठने के लिए एक और शाम मिल जाएगी। मगर कई बार ऐसा अवसर दोबारा नहीं आता और मन में कही-अनकही बातें रह जाती हैं।
पीढ़ियां याद रखेंगी नाना पाटेकर का अभिनय और दमदार आवाज: शेखर सुमन ने अपने संदेश में नाना पाटेकर के योगदान और उनके व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अभिनेता को इस बात का एहसास रहा होगा कि लोग उन्हें कितना प्यार करते थे, कितना सम्मान देते थे और उनके काम को कितनी पसंद करते थे। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाली पीढ़ियां नाना के अभिनय, उनके संवादों और उनकी प्रभावशाली आवाज को याद करती रहेंगी। हालांकि शेखर के लिए नाना की पहचान केवल फिल्मों तक सीमित नहीं थी। उन्होंने उस इंसान को भी याद किया, जिसने अपनी असलियत से समझौता नहीं किया और अपने सिद्धांतों के साथ जीवन जिया। शेखर ने भावुक शब्दों में कहा कि ‘शेखर टुनाइट’ के पहले सत्र का समापन नाना पाटेकर की आवाज और मौजूदगी के साथ होना था, लेकिन अब कार्यक्रम उनकी खामोशी के साथ समाप्त होगा। यह खालीपन उनके मन में लंबे समय तक बना रहेगा।
‘अलविदा नाना’ कहकर दी श्रद्धांजलि, आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना: नाना पाटेकर को अंतिम विदाई देते हुए शेखर सुमन ने कहा कि उनकी जिंदगी की कहानी में अभिनेता की जगह हमेशा बनी रहेगी। उन्होंने अपने संदेश का समापन ‘अलविदा, नाना’ और ‘ओम शांति’ के शब्दों के साथ किया। शेखर का कार्यक्रम रद्द करने का फैसला इस बात को दर्शाता है कि वह इस मुलाकात को कितना महत्वपूर्ण मानते थे और नाना के निधन से उन्हें कितना गहरा आघात पहुंचा है। जिस अतिथि के साथ पहले सत्र का आखिरी कार्यक्रम यादगार बातचीत के रूप में पूरा होना था, उसकी अनुपस्थिति अब इस समापन की सबसे बड़ी पहचान बन गई है। शेखर के लिए यह केवल एक कार्यक्रम का रद्द होना नहीं, बल्कि एक ऐसी मुलाकात का हमेशा के लिए छूट जाना है, जिसका इंतजार था। उन्होंने दिवंगत अभिनेता को सम्मानपूर्वक याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।















































