नवरात्रि की प्रमुख तिथियों को लेकर क्यों है असमंजस: शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना, शक्ति उपासना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व रखता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में प्रत्येक तिथि का अपना अलग धार्मिक महत्व होता है, लेकिन सप्तमी, महाअष्टमी, महानवमी और विजयादशमी को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इन दिनों मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना के साथ व्रत, हवन, कन्या पूजन और व्रत पारण जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं। वर्ष 2026 में सप्तमी और अष्टमी की तिथियां दो-दो दिनों में पड़ने के कारण श्रद्धालुओं के सामने यह सवाल है कि किस दिन व्रत रखा जाए और किस तारीख को मुख्य पूजा करना उचित रहेगा। ऐसे में पंचांग में दी गई तिथियों, उनके प्रारंभ और समाप्ति के समय तथा पूजा के शुभ मुहूर्त को समझना जरूरी है। सही तिथि के अनुसार पूजा करने से श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप अनुष्ठान संपन्न कर सकते हैं।
नवरात्रि सप्तमी 2026: 17 या 18 अक्टूबर को कब रखें व्रत: इस वर्ष सप्तमी तिथि 17 और 18 अक्टूबर, दोनों दिनों में व्याप्त रहेगी। इसी वजह से सप्तमी के व्रत की तारीख का निर्धारण इस बात के आधार पर किया जा सकता है कि श्रद्धालु महाअष्टमी का पूजन किस दिन कर रहे हैं। जो भक्त 18 अक्टूबर को अष्टमी की पूजा करेंगे, उन्हें 17 अक्टूबर को सप्तमी का व्रत रखना चाहिए। वहीं, जो श्रद्धालु 19 अक्टूबर को अष्टमी मनाएंगे, वे 18 अक्टूबर को सप्तमी का व्रत रख सकते हैं। नवरात्रि के दौरान सप्तमी तिथि पर मां दुर्गा की उपासना और विशेष पूजन का महत्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा करते हैं और अगले दिन की अष्टमी पूजा की तैयारियां भी पूरी करते हैं। जिन परिवारों में सप्तमी और अष्टमी के व्रत की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, वे अपने प्रचलित धार्मिक विधान और मान्य पंचांग के अनुसार तिथि का निर्णय कर सकते हैं।
महाअष्टमी 2026: 18 अक्टूबर को महानिशा पूजा का विशेष महत्व: इस वर्ष अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर की सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 19 अक्टूबर की सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। तिथि दो दिनों में व्याप्त होने के कारण महाअष्टमी की पूजा को लेकर अलग-अलग गणनाएं सामने आ रही हैं। कुछ पंचांगों में 19 अक्टूबर को अष्टमी मनाने का उल्लेख है, जबकि कुछ ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 18 अक्टूबर को महाअष्टमी का पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मोहरात्रि भी कहा जाता है। इस तिथि में महानिशा पूजा का विशेष महत्व बताया गया है और इसी कारण रात्रिकालीन पूजा तथा विशेष अनुष्ठानों को महत्वपूर्ण माना जाता है। अष्टमी पर मां दुर्गा की आराधना, हवन और कन्या पूजन करने की परंपरा भी प्रचलित है। जो श्रद्धालु अष्टमी का व्रत रखते हैं, उन्हें पूजा की तारीख तय करते समय तिथि के समय और अपनी पारिवारिक परंपरा का ध्यान रखना चाहिए, ताकि सभी अनुष्ठान व्यवस्थित ढंग से पूरे किए जा सकें।
महानवमी 2026: 19 अक्टूबर को होगी पूजा, जानें तिथि का समय: नवरात्रि की महानवमी सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार नवमी तिथि 19 अक्टूबर की सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। नवरात्रि के अंतिम चरण में आने वाली नवमी को मां दुर्गा की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु पूजा-अर्चना, हवन और कन्या पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। कन्या पूजन में छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और भोजन कराने के साथ सामर्थ्य के अनुसार उपहार या दक्षिणा दी जाती है। कई परिवारों में अष्टमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा है, जबकि कुछ परिवार नवमी को यह अनुष्ठान करते हैं। इसलिए श्रद्धालुओं को अपनी परंपरा के अनुसार अष्टमी या नवमी की पूजा का दिन निर्धारित करना चाहिए। नवमी तिथि 20 अक्टूबर की दोपहर तक रहने के कारण इस दिन के अनुष्ठानों की योजना बनाते समय तिथि के समय का विशेष ध्यान रखना उपयोगी रहेगा।
दशमी 2026: व्रत पारण कब करें और विजयादशमी का क्या है महत्व: नवरात्रि की दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 को शुरू होगी और 21 अक्टूबर की दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। कई श्रद्धालु इसी दिन नवरात्रि के नौ दिनों के व्रत का पारण करते हैं। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार दशमी के दिन दोपहर 12 बजकर 50 मिनट के बाद पारण का समय बताया गया है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपनी परंपरा और पूजा-विधान के अनुसार अनुष्ठान पूरा करने के बाद ही पारण करना चाहिए। दशमी के दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ नवरात्रि के समापन की धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। हालांकि, व्रत पारण की रीति परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है, इसलिए श्रद्धालु अपनी प्रचलित परंपरा का पालन कर सकते हैं। दशमी तिथि के समय को ध्यान में रखकर पूजा और पारण की तैयारी करने से धार्मिक कार्यों को व्यवस्थित रूप से संपन्न करने में मदद मिलती है।
दशहरा 2026: 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा विजयादशमी का पर्व: विजयादशमी यानी दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन पूजा-पाठ के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत और विजय से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहता है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं, अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1 बजकर 14 मिनट से 3 बजकर 30 मिनट तक बताया गया है। श्रद्धालु इस अवधि में अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना और विजयादशमी से जुड़े अनुष्ठान कर सकते हैं। नवरात्रि के समापन के साथ आने वाला यह पर्व मां दुर्गा की आराधना और धर्म की स्थापना के संदेश को आगे बढ़ाता है। सप्तमी से दशहरा तक की तिथियों और शुभ समय को ध्यान में रखकर श्रद्धालु अपने व्रत, कन्या पूजन, हवन और विजयादशमी की पूजा की तैयारी कर सकते हैं।














































