राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के नए आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के भीतर अपराध के ग्राफ में भारी गिरावट दर्ज की गई है। साल 2017 के मुकाबले साल 2024 तक राज्य में लगभग हर तरह के संगीन अपराधों के मामलों में काफी कमी आई है। आंकड़ों के मुताबिक सूबे में साल 2017 में जहां हत्या के कुल 4,324 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं साल 2024 में यह संख्या घटकर 3,215 रह गई है। यह गिरावट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि राज्य में अपराधियों के भीतर पुलिस का खौफ पहले से काफी ज्यादा बढ़ गया है।
अपहरण और फिरौती में कमी: एनसीआरबी का डेटा यह भी बताता है कि राज्य में अपहरण और फिरौती जैसे संगठित अपराधों पर काफी हद तक लगाम लगाई जा चुकी है। साल 2017 में उत्तर प्रदेश के भीतर अपहरण के कुल 19,921 मामले सामने आए थे, जो साल 2024 में भारी कमी के साथ महज 11,773 रह गए हैं। इसी तरह फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में भी एक बड़ा सुधार देखने को मिला है। साल 2017 में फिरौती के कुल 46 मामले दर्ज हुए थे, जो साल 2024 के आंकड़ों में घटकर केवल 26 रह गए हैं।
महिला सुरक्षा और चोरी पर लगाम: महिला सुरक्षा के मोर्चे पर भी सरकारी दावों के अनुसार सूबे में पहले के मुकाबले काफी सुधारात्मक आंकड़े देखने को मिले हैं। साल 2017 में राज्य भर में बलात्कार के कुल 4,246 मामले दर्ज किए गए थे, जो साल 2024 में घटकर 3,209 हो गए हैं। इसके अलावा संपत्ति संबंधी अपराधों जैसे चोरी के मामलों में भी भारी गिरावट आई है; साल 2017 में चोरी के 60,434 मामले थे, जो 2024 में 43,598 रह गए। डकैती के मामलों में तो ऐतिहासिक सुधार हुआ है और यह 263 से घटकर केवल 57 मामलों पर आ गया है।
मेरठ और आगरा का डेटा: उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा मार्च 2017 से लेकर मई 2026 तक अलग-अलग जोनों में अपराधियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया है। इस दौरान मेरठ जोन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा, जहां कुल 4813 मुठभेड़ें दर्ज की गईं। मेरठ जोन में हुई इन पुलिस कार्रवाइयों में 97 अपराधी ढेर हुए, जबकि 3513 घायल हुए और कुल 8921 अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा गया। वहीं आगरा जोन में इस अवधि में 2494 मुठभेड़ें हुईं, जिनमें 24 अपराधी मारे गए, 968 घायल हुए और 5845 गिरफ्तार किए गए।
वाराणसी जोन के आंकड़े: पूर्वांचल के महत्वपूर्ण वाराणसी जोन में भी इस पूरी समयावधि के दौरान पुलिस ने अपराधियों और माफियाओं पर चौतरफा शिकंजा कसा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वाराणसी जोन में मार्च 2017 से लेकर मई 2026 तक कुल 1292 बार पुलिस और बदमाशों के बीच आमना-सामना हुआ। इन सभी मुठभेड़ों में कुल 29 इनामी अपराधियों को पुलिस ने मार गिराने में बड़ी सफलता हासिल की है। इसके अलावा इन अभियानों में 907 बदमाश गोली लगने से घायल हुए और कुल 2426 मुस्तैद अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
सख्त पुलिसिंग की नई नीति: उत्तर प्रदेश में इस समय कानून का राज स्थापित करने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा एक बेहद सख्त और नई नीति के तहत काम किया जा रहा है। अपराधियों और माफियाओं के आर्थिक साम्राज्य को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए बड़े पैमाने पर गैंगस्टर एक्ट और बुलडोजर एक्शन का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस कड़क नीति के कारण प्रदेश में बड़े-बड़े माफियाओं और संगठित गिरोहों पर पूरी तरह से शिकंजा कस दिया गया है। इस कड़े रुख का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को एक सुरक्षित और भयमुक्त माहौल प्रदान करना है।





































