राज्य की केवल 20 फीसदी आबादी ही प्रधानमंत्री जन आरोग्य व मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत योजना) का लाभ पाने की हकदार है। जबकि उत्तराखंड में 100 फीसदी, उड़ीसा और तमिलनाडु जैसे राज्यों में 90 से 95 फीसदी आबादी आयुष्मान भारत योजना से कवर्ड हैं। इन राज्यों में अंत्योदय योजना और पात्र गृहस्थी राशन के लाभार्थियों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ राज्य सरकार अपने हिस्से से दे रही है। इसके उलट उ.प्र. में अंत्योदय योजना राशन कार्ड के 40 लाख कार्डधारकों के 1 करोड़ 28 लाख लाभार्थियों को ही आयुष्मान योजना का लाभ मिल रहा है। जबकि पात्र गृहस्थी के 3 करोड़ 17 लाख कार्डधारकों के परिवार के 12 करोड़ 60 लाख लाभार्थी आयुष्मान योजना के लाभ से वंचित हैं।
विडंवना तो यह है कि अंत्योदय कार्ड धारक और पात्र गृहस्थी कार्डधारक दोनो ही गरीब की श्रेणी में आते हैं। दोनों तरफ से कार्डधारकों को केद्र सरकार और राज्य सरकार गरीब की श्रेणी में रखकर कोरोना काल में शुरू की गई मुफ्त राशन योजना का लगातार लाभ दे रही है। एक जनवरी के मुताबिक प्रदेश की आबादी करीब 25 करोड़ है। इसमें प्रदेश में 1 करोड़ 77 लाख परिवार यानि 5 करोड़ की आबादी ही आयुष्मान योजना से कवर्ड है। इसमें प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 2011 की जनगणना के मुताबिक एक करोड़ 18 लाख, अंतोदय के तहत 40 लाख मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत करीब आठ लाख और 11 लाख भवन निर्माण से जुड़े पंजीकृत श्रमिक शामिल हैं। प्रधानमंत्री योजना के तहत पांच लाख रुपये का मुफ्त इलाज देने के लिए केन्द्र सरकार प्रति परिवार हर से वंचित हैं। विडम्बना तो यह गई मुफ्त राशन योजना का लगातार साल 1102 रुपए का प्रीमियम बीमा कोरोना काल में शुरू की से कवर्ड है। इसमें प्रधानमंत्री जन प्रीमियम राशि खुद ही वहन करती है।
क्या कहती हैं साचीज़ की अधिकारी?
संगीता सिंह मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्टेट एजेन्सी फॉर कॉम्प्रहेन्सिव हेल्थ एण्ड इन्टीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज़) का कहना है कि जिस वर्ग को आयुष्मान भारत योजना का लाभ देने के लिए सरकार बजट आवंटित करती है, उसे ही योजना से जोड़ा जाता है।
पात्र गृहस्थी कार्ड के लिए पात्रता-
• शहरी क्षेत्र में 3 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय न हो, आयकर दाता न हो, पांच केवी का जनरेटर न हो।
• ग्रामीण क्षेत्र में 2 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय न हो, पांच एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, एक से अधिक शस्त्र का लाइसेंस न हो।


































