हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में से एक गरुड़ पुराण है जिसे 17वां पुराण कहा गया है इसमें भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के बीच हुई वार्तालाप का वर्णन किया गया है गरुड़ पुराण में मनुष्य की मृत्यु और इसके बाद के सफर के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया है वही लोक मान्यताओं के अनुसार गरुड़ पुराण का पाठ तब किया जाता है जब किसी की मृत्यु हो जाती है

गरुड़ पुराण केअनुसार व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके कर्मों के अनुसार उसे स्वर्ग या नरक प्राप्त होता है मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक में यमराज के समक्ष पेश किया जाता है जहां उसके कर्मों के अनुरूप स्वर्ग या नरक भेजने का निर्धारण होता है लेकिन गरुड़ पुराण में ऐसा जिक्र है कि बच्चों की मृत्यु के बाद उनकी आत्माओं को नरक नहीं भेजा जाता है उनको केवल स्वर्ग की प्राप्ति होत है, तो आज हम अपने इस लेख में इसी विषय पर चर्चा कर रहे हैं तो आइए जानते हैं।

गरुड़ पुराण में है इसका जिक्र-
सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार गरुड़ पुराण में मृत्यु से जुड़ी कई अहम बातों का वर्णन विस्तार पूर्वक किया गया है गरुड़ पुराण में उल्लेख मिलता है कि 15 वर्ष की आयु से अधिक वाले अच्छे लोगों को स्वर्ग लोक और पापी अधर्मी लोगों को नर्क लोक भेज दिया जाता है लेकिन 15 वर्ष से कम आयु वाले लोगों को बच्चों की श्रेणी में गिना जाता है

ऐसे में इन बच्चों को कर्म के आधार पर नहीं बल्कि उनकी आयु के अनुसार केवल स्वर्ग लोक ही भेजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि 15 साल से कम आयु के बच्चे भोलेपन के कारण गलतियां कर बैठते हैं उन बच्चों को अच्छे और बुरे कर्मों का ज्ञान भी नहीं होता है इसलिए भगवान उनकी सभी गलतियों को क्षमा कर देते हैं और उनकी आत्माओं को स्वर्ग लोक में भेज दिया जाता है।



































