देवताओं की पूजा में विभिन्न सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। भगवान की पूजा के दौरान धूप, कपूर, दीपक आदि जलाए जाते हैं। आमतौर पर हम अगरबत्ती जलाकर भगवान की पूजा शुरू करते हैं।
कहा जाता है कि अगरबत्ती जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। लेकिन वास्तु शास्त्र में अगरबत्ती जलाने के विशेष नियम बताए गए हैं। पंडित इंद्रमणि घनस्याल बताते हैं कि भगवान की पूजा के दौरान अगरबत्ती जलाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

अगरबत्ती जलाने के फायदे
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी देवी-देवता की पूजा करते समय अगरबत्ती जलाना शुभ होता है। पूजा करते समय अगरबत्ती की महक से घर का वातावरण शुद्ध होता है। अगरबत्ती जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अगरबत्ती की महक से देवता भी प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा परिवार पर बनी रहती है।
अगरबत्ती को सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, इसलिए अगरबत्ती जलाना शुभ होता है। अगरबत्ती से निकलने वाले धुएं से हवा में मौजूद बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाते हैं, जो सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दक्षिण दिशा में अगरबत्ती जलाने से घर की नकारात्मकता दूर होती है।

बांस की अगरबत्ती अशुभ होती है
धार्मिक शास्त्रों में बांस के पेड़ को बहुत ही शुभ माना गया है। विवाह जैसे आयोजनों में मंडप बनाने में भी बांस की लकड़ी का उपयोग किया जाता है। इसी तरह अगरबत्ती भी बांस की लकड़ी से बनाई जाती है, लेकिन
बांस की लकड़ी से बनी अगरबत्ती जलाना शुभ नहीं माना जाता है।
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार बांस की लकड़ी जलाने से वंश की वृद्धि नहीं होती है। इससे पितृ दोष होता है, जिससे घर की बरकत नहीं होती है, इसलिए शास्त्रों में बांस की लकड़ी से बनी अगरबत्ती जलाने की मनाही है।



































