ठाट-बाट से जीवन जीने के लिए संपत्ति की अवश्यकता होती है। हर व्यक्ति अधिक से अधिक दौलत पाने का प्रयास करता है। यह जरूरी नहीं है की हर किसी पर महालक्ष्मी मेहरबान हो।
कुछ ऐसे संकेत हैं, जिन से जाना जा सकता है कि लक्ष्मी आप पर प्रसन्न हैं या नहीं।
जिस परिवार में पति-पत्नी में एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान बना रहता है, जिस घर में कलह नहीं होती, उसमें लक्ष्मी का वास होता है।
जो घर स्वच्छ होता है, वहां लक्ष्मी स्थिर रहती हैं। जो लोग परिश्रमी, बुद्धिमान और साहसी होते हैं, लक्ष्मी उन पर सदैव प्रसन्न रहती है।
जो गृहिणी बार-बार भोजन करने वाली, भोजन पकाते समय ही खाने वाली तथा अशुद्ध परोसने वाली होती है, लक्ष्मी उससे दूर चली जाती हैं।
आलसी, दिन में सोने वाले, प्रात: या सायंकाल में संभोग करने वाले लोगों से लक्ष्मी रूठ जाती हैं।
जो व्यक्ति माता-पिता और सद्गुरु का अनादर करता है, उनकी सेवा और दक्षिणा नहीं देता है, उससे भी लक्ष्मी अप्रसन्न रहती हैं।
जो व्यक्ति मूर्ख, अनपढ़ व अकर्मण्य होकर अर्थ प्राप्ति के लिए प्रयत्न नहीं करता, लक्ष्मी उससे क्रुद्ध रहती हैं।
जो व्यक्ति दूसरे की स्त्री और धन को हड़प लेता है चोरी अथवा घूसखोरी करता है, उसे लक्ष्मी दोष लग जाता है। इस दोष के कारण कुछ समय के पश्चात वह दरिद्र हो जाता है।
प्रति शुक्रवार को महालक्ष्मी के मंदिर में लाल गुलाब के फूल अर्पित करें। इससे लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं।
निर्धनों या ब्राह्मणों या संन्यासियों को भोजन, वस्त्र और रुपए दान करें। दान से धन की वृद्धि और शुद्धि होती है। इससे सभी दोष दूर होंगे और धन-धान्य की प्राप्ति होगी।



































