हिंदू धर्म में ओम को सबसे अधिक पवित्र बताया गया है ओम पर लोगों की अटूट आस्था और विश्वास है मान्यता है कि इसका सीधा संबंध भगवान शिव से है अधिकतर लोगों को आपने ओम का जाप करते देखा हो, ओम शिव साधना आराधना को दर्शाता है, मान्यता है कि इस शब्द का जाप मात्र से ईश्वर की कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा ओम के महत्व को विस्तार से बता रहे हैं तो आइए जानते है।शास्त्रों में ओम का जाप पुण्यदायी बताया गया है ओम् शब्द का जाप और साधना इसलिए क्योंकि मानव दिमाग को स्वस्थ्य रहने के लिए शांति की आवश्यकता होती है शक्ति की जरूरत पड़ती है जब हम ओम् का उच्चारण करते हैं तो ओ से शुरू कर म् के उच्चारण के साथ इसका समापन करते हैं उस समापन बिंदु पर जहां आपका ओम् का जाप समाप्त होता है म् पूरी तरह से मौन शांति में जाकर मिल जाती है फिर इस बिंदु पर असीम शांति हाती है यह असीम शांति मन का मौन, प्रचुर शक्ति से भर देती हैकहा जाता है कि जब ओम् का उच्चारण किया जाता है तो 432 Hz का कंपन होता है ठीक यही कपंन की आवृत्ति पूरे प्रकृति में पाई जाती है यहां तक की धरती के अक्ष पर घूर्णन गति से उत्पन्न होने वाली ध्वनि भी इसके ही समान है समान आवृत्ति की।कहा जाता है कि अंतरिक्ष, ब्रहमांड सभी जगह, ब्रहमांड की मूल ध्वनि ओम् हीं है। ॐ संपूर्ण ब्रहमांड में गूंज रहा है जिसे तारामंडल नक्षत्र ग्रह आदि एक दूसरे से दूरी बनाए परस्पर आकर्षण में एक निश्चित लय में घूम रहे हैं ॐ के उच्चारण से ध्वनि में कंपन शक्ति पैदा होती है जिसका प्रभाव शरीर के प्रत्येक कोशिका पर पड़ता है, वही ओम् की वैज्ञानिकता को समझने के लिए यही काफी है।



































