हिंदू धर्म में पूर्णिमा और अमावस्या की तिथि को खास माना जाता है लेकिन इन सभी में पौष मास में पड़ने वाली पूर्णिमा बेहद महत्वपूर्ण होती है मान्यता है कि इस दिन सुबह स्नान आदि करके पूजा पाठ व दान धर्म के कार्य करने से ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है जिससे भक्तों के सभी कष्टो का निवारण हो जाता है

पौष पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान सबसे उत्तम बताया गया है ऐसे में अगर आप गंगा स्नान नहीं कर सकते हैं तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें इससे भी लाभ मिलेगा। पौष माह की पूर्णिमा साल 2023 में 6 जनवरी को पड़ रही है इसे शांकभरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है तो आज हम आपको इससे जुड़ी जानकारी प्रदान कर रहे हैं तो आइए जानते हैं।

पौष पूर्णिमा का मुहूर्त-
धार्मिक पंचांग के अनुसार पौष मास की पूर्णिमा तिथि 6 जनवरी 2023 दिन शुक्रवार की सुबह तड़के 2 बजकर 14 मिनट से आरंभ हो रही है वही 7 जनवरी की सुबह 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगी उदया तिथि के अनुसार 6 जनवरी को ही पौष मास की पूर्णिमा की व्रत पूजा की जाएगी। इस दिन शुक्रवार पड़ने से इसका महत्व और अधिक हो गा है ऐसे में इस दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय भी किए जा सकते हैं। जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

पौष पूर्णिमा के दिन संगम तट पर स्नान दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है इतना ही नहीं इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से पूरे पौष मास में पूजा पाठ करने जितना पुण्य फल भी मिलता है और जातक के सभी पाप धुल जाते हैं। पौष पूर्णिमा के दिन सुबह सूर्यदेव को जल अर्पित करना चाहिए साथ ही शाम के वक्त चंद्रमा को भी जल चढ़ाने का विधान होता है इसके अलावा इस दिन गुड़, चीनी, चावल दान करने से घर परिवार में सुख समृद्धि और शांति आती है। पूर्णिमा की रात को माता लक्ष्मी की पूजा करने और उन्हें दूध से बनी चीजें अर्पित करने से वे प्रसन्न होकर कृपा बरसाती हैं जिससे धन लाभ की प्राप्ति होती है।



































