सनातन धर्म में कई तीज और त्योहार मनाए जाते हैं और व्रत रखे जाते हैं। इन सभी त्योहारों का अपना विशेष महत्व है। माघ मास की गुप्त नवरात्रि में सप्तमी तिथि को अचला सप्तमी व्रत रखा जाता है, जो आज (28 जनवरी 2023) शनिवार को पड़ रहा है.
भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं युधिष्ठिर को इस व्रत का महत्व और पूजा विधि बताई थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति इस व्रत को रखता है, वह अस्के गर में खुशिया उर शुक्ष-समर्द्धी रहता है। आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी और वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से व्रत की विधि और महत्व।
अचला सप्तमी पूजा का समय
हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का प्रारंभ 27 जनवरी 2023 को सुबह 9 बजकर 10 मिनट पर हो गया है. यह तिथि 28 जनवरी सुबह 8 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। इस तिथि में सूर्योदय से आज अचला सप्तमी का व्रत रखा जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विनी नक्षत्र होने से सौम्य नाम का शुभ योग पूरे दिन के लिए बन रहा है। इस दौरान भरणी और साध्य योग भी बन रहा है।

अचला सप्तमी व्रत की पूजा विधि
– इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करें.
– इसके बाद एक तांबे का दीपक लें, उसमें तिल का तेल डालकर जलाएं और फिर उस दीपक को अपने सिरहाने रखकर सूर्य देव का ध्यान करें. इस दौरान इन मंत्रों का जाप करें-
1. नमस्ते रुद्ररूपाय रसानाम्पतये नम:।
वरुणाय नमस्तेस्तु हरिवास नमोस्तु ते।।
2. यावज्जन्म कृतं पापं मया जन्मसु सप्तसु।
तन्मे रोगं च शोकं च माकरी हन्तु सप्तमी।
जननी सर्वभूतानां सप्तमी सप्तसप्तिके।
सर्वव्याधिहरे देवि नमस्ते रविमण्डले।।

– इन मंत्रों का जाप करने के बाद दीपक को नदी में प्रवाहित कर दें।
इसके बाद सूर्य भगवान की पूजा करते हुए उन्हें फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और वस्त्र अर्पित करें और साथ ही “स्वस्थानं गम्यतम” मंत्र का जाप करें।
– अब एक मिट्टी के बर्तन में गुड़, तिल और घी डालकर लाल कपड़े से ढककर किसी गरीब ब्राह्मण को दान कर दें.
इसके बाद गुरु को तिल, वस्त्र, गाय और दक्षिणा अर्पित करें और उनका आशीर्वाद लें।
यदि गुरु नहीं है तो आप किसी योग्य गरीब या जरूरतमंद ब्राह्मण को भी दान कर सकते हैं। ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत का समापन करें।



































