दिल्ली नगर निगम चुनाव (MCD Election) के नतीजे घोषित हुए करीब ढाई महीने बीत चुके हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में जारी जंग के चलते अब तक यहां कोई मेयर नहीं चुना जा सका है।
दिल्ली में मेयर चुनाव के लिए बीते एक महीने में तीन बार एमसीडी सदन की बैठकें बुलाई गईं, जो हर बार बेनतीजा ही रहीं। अब 16 फरवरी को एक बार फिर मेयर का चुनाव कराने के लिए सदन की बैठक होने जा रही है।
मेयर चुनाव में हो रही देरी का सबसे अधिक नुकसान दिल्ली की जनता के बाद अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को उठाना पड़ा है। इस लड़ाई में भाजपा और कांग्रेस ‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’ वाली स्थिति में बनी हुई हैं। चुनाव टलने से ‘आप’ को अब तक एक नुकसान तो हो चुका है। अब अगर ‘आप’ का मेयर चुन भी लिया जाता है तो उसका कार्यकाल डेढ़ महीने से भी कम का होगा।
मेयर, डिप्टी मेयर और स्टेंडिंग कमेटी के सदस्यों का चुनाव किए बिना एल्डरमेन को वोटिंग का अधिकार देने के फैसले पर हंगामे और तीखी नोक-झोंक के बीच पिछले एक महीने में सदन की लगातार तीन बैठकें स्थगित कर दी गईं।
बता दें कि, दिसंबर में हुए एमसीडी चुनावों में ‘आप’ 250 वार्ड में से सर्वाधिक 134 वार्ड जीतकर विजेता के रूप में उभरी थी, जबकि भाजपा ने 104 वार्ड जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया और कांग्रेस महज 9 वार्ड ही जीत सकी थी।
मेयर चुनाव के लिए 16 फरवरी को फिर होगी एमसीडी सदन की बैठक
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के सक्सेना ने मेयर का चुनाव कराने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) सदन के अगले सत्र की बैठक 16 फरवरी को बुलाने की मंजूरी दे दी है। सूत्रों ने बताया कि दिल्ली सरकार ने सदन का 16 फरवरी को सत्र बुलाने के लिए प्रस्ताव भेजा था, जिसे एलजी ने स्वीकार कर लिया है।



































