दिल्ली के कथित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की एंट्री से सिसोदिया की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सीबीआई के साथ ईडी कई अहम कड़ियों को जोड़ने का काम करेगी। यदि ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के सुराग खोज निकाले और सिसोदिया को कठघरे में खड़ा किया तो जाहिर है छानबीन में महत्वपूर्ण मोड़ आ सकता है।
इस मामले में मंगलवार को कई घटनाक्रम सामने आए। एक ओर सीबीआई ने इस केस में सिसोदिया के निजी सहायक देवेंद्र शर्मा से पूछताछ की तो दूसरी ओर ईडी ने मनीष सिसोदिया से करीब पांच घंटे पूछताछ की और उनका बयान दर्ज किया।
आरोप है कि देवेंद्र शर्मा ने मनीष सिसोदिया के कहने पर अपने खर्च से मोबाइल फोन खरीदे थे। इन फोन का इस्तेमाल सिसोदिया ने किया था। अधिकारियों का कहना है कि शर्मा उर्फ रिंकू को सीबीआई मुख्यालय बुलाया गया जहां उनसे पूछताछ की गई। सूत्रों का कहना है कि निजी सचिव होने के नाते शर्मा के पास कथित शराब घोटाले को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां हो सकती हैं।
सूत्रों की मानें तो सीबीआई ने वर्ष 2021-22 में रद्द की जा चुकी आबकारी नीति में कथित भ्रष्टाचार के संबंध में घूस और अनुचित तरीकों का इस्तेमाल को लेकर कई अहम सूत्रों को खंगाला है। सूत्रों ने यह भी बताया कि 10 मार्च को सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई होगी जिसमें सीबीआई पूरी तैयारी के साथ जमानत याचिका का विरोध करेगी। चूंकि इस मामले में हो रही सियासत के कारण सीबीआई पर सवाल उठाए जा रहे हैं इसलिए यह केस उसकी प्रतिष्ठा से भी जुड़ता नजर आ रहा है। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि इस केस को अंजाम तक पहुंचाने के लिए ईडी से भी अहम जानकारी साझा की जायेगी।
सूत्रों की मानें तो सीबीआई ने तकनीकी रूप से जो सबूत एकत्र किए हैं, वे बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में आने वाले दिनामें उन सबूतों की अनदेखी नहीं की जा सकती है। वहीं समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यदि ईडी की जांच टीम को लगता है कि आरोपी धन शोधन के अपराध का दोषी है और सवालों का जवाब देने में आनाकानी कर रहा है तो ईडी बेहद सख्त कदम उठा सकती है। ईडी इस मामले में पीएमएलए यानी मनीलॉन्ड्रिंग की धारा 19 लगा सकती है। इसके तहत उसे मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी की अनुमति मिल जाती है। ईडी का यह कदम सिसोदिया की मुश्किलें बढ़ा सकता है।



































