समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक कोलकाता में हो रही है। तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक से पहले शुक्रवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात कर 2024 के लोकसभा चुनाव से तीसरे मोर्चे के गठन का संदेश दिया।
सपा की रणनीति विपक्षी एकता की कोशिशों को परवान चढ़ाने के साथ यूपी में बीजेपी की घेराबंदी कर 2024 के लक्ष्यों तक पहुंचने की है। इसके लिए वो जातीय सियासत की बिसात पर बीजेपी को घेरने की रणनीति तैयार करने में जुटी है।
कार्यकारिणी बैठक में कई राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रस्ताव पेश किए जाने हैं। इन प्रस्तावों के जरिए जातीय जनगणना की मांग को लेकर देश भर में अभियान तेज करने के साथ ही विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ सीबीआई, ईडी जैसी एजेंसियों की कार्यवाही के खिलाफ मुखर विरोध सहित कई विषयों पर पार्टी की रणनीति को अमली जामा पहनाने की कोशिश होगी। इसके साथ ही कार्यकारिणी में 2024 को लेकर सपा किन दलों के साथ गठबंधन कर सकती है इसके भी संकेत मिलने की सम्भावना है। हालांकि इस बारे में अखिलेश कह चुके हैं कि यूपी में सपा के साथ गठबंधन में जो दल हैं उन्हीं के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। बता दें कि वर्तमान में सपा का जयंत चौधरी की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल और पल्लवी पटेल की पार्टी अपना दल (कमेरावादी) के साथ गठबंधन है। कुछ नेताओं की राय कांग्रेस को भी साथ लाने की है। उधर, ममता बनर्जी गैर बीजेपी और गैर कांग्रेसी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रही हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा था कि 2024 में सबको मिलकर काम करना है। केसीआर, ममता बनर्जी, नीतीश कुमार और एमके स्टालिन सभी गठबंधन की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इन प्रयासों के सफल होने की पूरी उम्मीद जताई।
अखिलेश-ममता मुलाकात के मायने
ममता बनर्जी की टीएमसी से समाजवादी पार्टी के मजबूत गठजोड़ की झलक 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिली थी। तब ममता, अखिलेश के समर्थन में प्रचार करने यूपी आई थीं। 2024 में भी दोनों नेता एक-दूसरे के लिए प्रचार करते नज़र आ सकते हैं।
अखिलेश की सोशल इंजीनियरिंग
2024 से पहले अखिलेश सपा के लिए नई सोशल इंजीनियरिंग करने की कोशिशों में जुटे हैं। इसके लिए वह पार्टी के परम्परागत यादव-मुस्लिम वोट बैंक के साथ ही दलित वोटरों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। पार्टी में बसपा से आए अम्बेडकरवादी नेताओं को खास तरजीह दी जा रही है। कार्यकारिणी में इस फॉर्मूले को और आगे बढ़ाने के साथ-साथ फोकस ग्रुप तैयार करने के लिए अभियान चलाने की रणनीति भी बन रही है।
23 मार्च को नवीन पटनायक से मिलेंगी ममता
तीसरे मोर्चे के गठन की कोशिशें लगातार परवान चढ़ रही हैं। कोलकाता में अखिलेश-ममता मुलाकात के बाद अब 23 मार्च को ममता बनर्जी की ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल के प्रमुख नवीन पटनायक मुलाकात होनी है। बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी की कोशिश कांग्रेस और बीजेपी दोनों से दूरी बनाकर चल रहे दलों को एकजुट करने की है। इस मोर्च में सपा के अलावा आम आदमी पार्टी, बीजू जनता दल, जनता दल सेक्युलर और भारतीय राष्ट्र समिति जैसे दलों को शामिल कराने की कोशिश है।



































