मुजफ्फरनगर:पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय बन चुका शार्प शूटर शाहरुख पठान आखिरकार पुलिस की गोली का शिकार हो गया। मेरठ STF फील्ड यूनिट के साथ हुई रविवार रात मुठभेड़ में शाहरुख गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। ₹50,000 का इनामी अपराधी शाहरुख मुख्तार अंसारी और संजीव जीवा जैसे माफिया गिरोहों से जुड़ा रहा है।
शाहरुख पठान का आपराधिक सफर:
- नाम: शाहरुख उर्फ शाहरुख पठान
- पिता: जरीफ
- निवासी: खलापार, मुजफ्फरनगर
- पहली बड़ी वारदात: 2015 में पुलिस कस्टडी में रेलवे स्टेशन पर आसिफ जायदा की हत्या
- जेल में संपर्क: जेल में रहते हुए मुख्तार अंसारी और संजीव जीवा से नजदीकियां बढ़ीं
- 2016: सिविल लाइन थाने से फरार
- 2017: हरिद्वार में कंबल व्यापारी गोल्डी की हत्या, फिर आसिफ के पिता की हत्या
गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड:
शाहरुख पर 11 संगीन केस दर्ज थे, जिनमें हत्या, हत्या की कोशिश, रंगदारी, आर्म्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट शामिल हैं:
- 302 IPC (हत्या) – रेलवे स्टेशन पर हत्या
- 223/224 IPC (हिरासत से भागना)
- 386 IPC (जबरन वसूली की धमकी)
- 2/3 गैंगस्टर एक्ट – मुजफ्फरनगर और हरिद्वार में
- 25/27 आर्म्स एक्ट – अवैध हथियारों के साथ पकड़ा जाना
- 506, 120B (आपराधिक साजिश और धमकी)
मुठभेड़ के दौरान बरामद हुआ भारी असलहा:
- 30MM इटली की बरेटा पिस्टल
- 32MM रिवॉल्वर आर्डिनेंस
- 9MM देसी पिस्टल
- बिना नंबर की ब्रेजा कार
- कुल 60+ कारतूस और कई खोखे
कैसे बना दुबारा गैंग लीडर?
गोल्डी मर्डर केस में उम्रकैद मिलने के बाद भी शाहरुख जमानत पर बाहर आया और फिर से गवाहों को धमकाना, हत्या की साजिश रचना और गैंग संचालन शुरू कर दिया। संभल जिले में उसके खिलाफ हाल ही में हत्या के प्रयास का केस दर्ज हुआ था।
STF का संदेश:
मेरठ STF की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि:
❝ अपराध का रास्ता या तो जेल में जाता है या फिर मौत तक। ❞
शाहरुख पठान सिर्फ एक शूटर नहीं था, वह मुख्तार अंसारी के नेटवर्क का वेस्ट यूपी में हिंसक विस्तार था। उसके मारे जाने से STF ने बड़े गैंग के नेटवर्क को कमजोर किया है, लेकिन इस घटना ने फिर यह भी दिखाया कि जेल में बैठे माफिया आज भी बाहर गैंग को संचालित कर रहे हैं।





























