तेहरान: मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच आमने-सामने की बातचीत की अटकलें तेज हैं, लेकिन ईरान की कड़ी शर्तों ने किसी भी समझौते की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फेर दिया है। वहीं, 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष ने ईरान में भारी तबाही मचाई है, जिसमें बड़ी संख्या में आम नागरिक और छात्र मारे गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ईरान बातचीत की मेज पर आने से पहले युद्ध के नुकसान का हर्जाना, भविष्य की सुरक्षा गारंटी और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर अपने औपचारिक कंट्रोल की मांग कर रहा है। अमेरिका पहले ही साफ कर चुका है कि वह इन शर्तों को किसी भी कीमत पर नहीं मानेगा। इसके अलावा, दोनों देश एक-दूसरे पर गंभीर आरोप भी लगा रहे हैं।
युद्ध के विनाशकारी प्रभाव और बड़े दावे:
- ईरान में मौतें: ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री अली जाफरियन के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक कम से कम 1,937 लोगों की मौत हो चुकी है।
- शिक्षा क्षेत्र को नुकसान: ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, हमलों में 250 छात्र और शिक्षक मारे गए हैं, जबकि 723 शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थानों को नुकसान पहुंचा है।
- ईरान का अमेरिका पर आरोप: ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दावा किया है कि अमेरिकी सैनिक खाड़ी देशों में अपने ठिकानों से भागकर होटलों में छिप गए हैं और आम नागरिकों का ‘ह्यूमन शील्ड’ (मानव ढाल) के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।





































