कानपुर में एक संगठित Human Organ Trafficking गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने एक छात्र की मजबूरी को अपना हथियार बनाया। मेरठ में एमबीए (MBA) की पढ़ाई कर रहे आयुष नाम के छात्र को अपनी फाइनल ईयर की फीस भरने के लिए इस काले कारोबार के जाल में फंसना पड़ा।
गिरोह का मॉडस ऑपरेंडी (Modus Operandi):
- वार्डबॉय बना मास्टरमाइंड: इस पूरे रैकेट का सरगना शिवम अग्रवाल उर्फ ‘शिवम काना’ है, जो एक नर्सिंग होम में वार्डबॉय था, लेकिन खुद को डॉक्टर बताकर शिकार फंसाता था।
- दस्तावेजों में हेरफेर: अवैध ट्रांसप्लांट को कानूनी रूप देने के लिए पीड़ित आयुष को मरीज का ‘दूर का भाई’ बताया गया और Emotional Donation के नाम पर कागजी जालसाजी की गई।
- भारी मुनाफाखोरी: बिचौलियों ने मरीज से 60 लाख रुपये वसूले, जबकि किडनी देने वाले छात्र को महज 9 लाख का वादा किया गया, जिसमें से उसे केवल 5 लाख ही मिले।
वर्तमान में STF, विजिलेंस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें शहर के नामी अस्पतालों में छापेमारी कर रही हैं। आहूजा नर्सिंग होम के डॉक्टर दंपत्ति और मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं।



































