नई दिल्ली/वाशिंगटन: मध्य-पूर्व के समीकरणों को पूरी तरह बदलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में ‘शासन परिवर्तन’ (Regime Change) की पुष्टि की है। ट्रंप ने कहा कि ईरान का पुराना और ‘बुरा’ शासन अब इतिहास बन चुका है और नया नेतृत्व अब अमेरिका के साथ शांति समझौते और ‘डील’ के लिए हाथ पैर मार रहा है।
होर्मुज और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अमेरिका अब ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) या मध्य-पूर्व के तेल पर निर्भर नहीं है।
- ऊर्जा आत्मनिर्भरता: ट्रंप के अनुसार, अमेरिका के पास गैस और तेल के अपने विशाल भंडार हैं, इसलिए उसे जलडमरूमध्य की रक्षा करने की आवश्यकता नहीं है।
- सहयोगियों को जिम्मेदारी: उन्होंने उन देशों को जलमार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने को कहा जो वहां से तेल आयात करते हैं।
- महंगाई से राहत: पेट्रोल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के लिए उन्होंने ईरान के ‘पागलपन भरे’ हमलों को जिम्मेदार ठहराया और वादा किया कि युद्ध समाप्त होते ही तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर कम हो जाएंगी।
रणनीतिक बदलाव इजरायल और सऊदी अरब जैसे सहयोगियों का आभार जताते हुए ट्रंप ने संकेत दिया कि अगले 2 से 3 सप्ताह में सैन्य अभियान पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। यह संबोधन न केवल एक युद्ध की समाप्ति का संकेत है, बल्कि यह ‘अमेरिका फर्स्ट’ की उस नीति का भी प्रमाण है जहाँ वाशिंगटन अब विदेशी ऊर्जा संसाधनों के लिए अपनी सेना को जोखिम में डालने के पक्ष में नहीं है।



































