ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम में सबसे बड़ा मोड़ Lebanon को लेकर आया है। जहाँ पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों ने अलग दावे किए थे, वहीं इजरायल ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट कर दिया है कि यह युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होता।
विश्लेषण:
- लेबनान पर सैन्य कार्रवाई (Military Action in Lebanon): इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ दो सप्ताह का संघर्ष विराम लेबनान मोर्चे पर उसकी कार्रवाई को नहीं रोकेगा। यह क्षेत्र में सैन्य संतुलन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण बयान है।
- पाकिस्तानी मध्यस्थता पर विरोधाभास (Contradictory Claims): इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि लेबनान भी इस समझौते का हिस्सा है।
- रणनीतिक स्पष्टता: इजरायल का मानना है कि जब तक ईरान अपनी ‘प्रॉक्सि’ ताकतों और आतंकवाद को पालना बंद नहीं करता, तब तक क्षेत्र में पूर्ण शांति संभव नहीं है। अमेरिका भी इस मुद्दे पर इजरायल के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।
इजरायल का यह स्टैंड बताता है कि ट्रंप की ‘डील’ को जमीन पर उतारने के लिए अभी बहुत सी बाधाएं पार करनी बाकी हैं।



































